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Noida Transport: निजी बसों के दबाव में रोडवेज, 10 मिनी डीजल बसें मुख्यालय लौटाईं

Noida Transport: निजी बसों के दबाव में रोडवेज, 10 मिनी डीजल बसें मुख्यालय लौटाईं

नोएडा : गौतमबुद्ध नगर जिले में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की कोशिशों के बीच रोडवेज को बड़ा झटका लगा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा डिपो को मिली 10 मिनी डीजल बसों को सड़कों पर उतारने से पहले ही वापस मुख्यालय भेजना पड़ा। इन बसों का संचालन नोएडा, गाजियाबाद और बुलंदशहर समेत कई रूटों पर प्रस्तावित था, लेकिन निजी बसों की मनमानी के कारण यह योजना लागू नहीं हो सकी।

परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार शहर के प्रमुख चौराहे परी चौक पर निजी बस संचालकों का दबदबा है। यहां निजी बसें सर्विस रोड के साथ-साथ मुख्य चौराहे के पास भी सवारियां बैठा लेती हैं, जबकि निगम की बसों को मुख्य मार्ग से गुजरने पर प्रतिबंध है। इस कारण रोडवेज बसों में सवारियों की कमी हो रही है और विभाग को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शासन की ओर से आमजन को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से नोएडा और ग्रेटर नोएडा डिपो को 10 मिनी डीजल बसें उपलब्ध कराई गई थीं। इनके संचालन के लिए रूट सर्वे भी किया गया और तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। हालांकि निजी बसों के अनियंत्रित संचालन और कम किराए पर सवारियां ढोने की वजह से रोडवेज को बसें वापस भेजने का फैसला लेना पड़ा।

रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि निजी बस संचालकों की मनमानी की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। स्थिति ऐसी बन गई है कि विभाग को आय के बजाय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से शासन से मिली मिनी बसों को वापस भेजना पड़ा।

नोएडा के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज सिंह ने बताया कि परी चौक पर निजी बसों की वजह से निगम की बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही थीं। ऐसे में बसों का संचालन घाटे का सौदा बन रहा था। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से निजी बसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं डीसीपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार का कहना है कि परी चौक पर निजी बसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और कई वाहनों के चालान भी काटे गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द ही इस समस्या पर नियंत्रण पाया जाए। अधिकारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो जिले में संचालित सीएनजी बसों की संख्या में भी कटौती करनी पड़ सकती है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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