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Noida Pollution: कंस्ट्रक्शन साइट्स पर ₹32 करोड़ जुर्माना, वसूली का रिकॉर्ड नहीं; RTI से उठे सवाल

Noida Pollution: कंस्ट्रक्शन साइट्स पर ₹32 करोड़ जुर्माना, वसूली का रिकॉर्ड नहीं; RTI से उठे सवाल

Noida में बढ़ते एयर पॉल्यूशन और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर नियमों की अनदेखी के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि पिछले कई वर्षों में करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया, लेकिन उसकी वसूली का रिकॉर्ड संबंधित विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।

पर्यावरण कार्यकर्ता Amit Gupta द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में Uttar Pradesh Pollution Control Board के क्षेत्रीय कार्यालय ने बताया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच एयर पॉल्यूशन से जुड़े मामलों में डिफॉल्ट करने वाले कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स और संस्थाओं पर ₹32 करोड़ से अधिक का एनवायरनमेंटल कंपनसेशन लगाया गया है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस राशि की वास्तविक वसूली के बारे में कार्यालय के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

आरटीआई के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक 31 डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है और लगभग ₹16.40 लाख के पर्यावरणीय जुर्माने की सिफारिश Noida Authority को भेजी गई है। लेकिन इस राशि की वसूली हुई या नहीं, इसका रिकॉर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के पास उपलब्ध नहीं है।

पिछले पांच महीनों में निरीक्षण के दौरान 55 एजेंसियों और कॉन्ट्रैक्टरों पर करीब ₹2.1 मिलियन (लगभग ₹21 लाख) का जुर्माना लगाया गया। जांच में पाया गया कि इन एजेंसियों ने Construction and Demolition Waste Management Rules 2016 और 25 जनवरी 2018 के डस्ट कंट्रोल नोटिफिकेशन का उल्लंघन किया था।

निरीक्षण के दौरान सेक्टर 1, 2, 5, 6, 8, 14, 49, 50, 51, 58-59, 60, 63, 70-121, 74-117, 74-136, 78, 81, 83, 85, 91, 115, 116, 122, 129, 132, 142, 154 और फेज-2 समेत कई इलाकों में डस्ट कंट्रोल नियमों के उल्लंघन पाए गए। इन मामलों में ₹10,000 से ₹50,000 तक के पर्यावरणीय कंपनसेशन की सिफारिश की गई।

इस बीच शहर में प्रदूषण से जुड़ा एक मामला National Green Tribunal में भी लंबित है। इसके बावजूद कंस्ट्रक्शन साइट्स पर डस्ट कंट्रोल नियमों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

रीजनल ऑफिसर Ritesh Tiwari ने बताया कि कमियों से जुड़ा पूरा डेटा नोएडा अथॉरिटी को भेज दिया गया है। अब संबंधित अथॉरिटी के अधिकारी इस आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।

आरटीआई से सामने आए इन आंकड़ों ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब वर्षों से करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय कंपनसेशन तय किया गया है, तो उसकी वसूली का स्पष्ट रिकॉर्ड विभाग के पास क्यों नहीं है।

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