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Noida Ola Uber: नोएडा में ओला-उबर समेत ई-कॉमर्स कंपनियों के काफिले में बड़ा बदलाव, पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों की होगी छुट्टी

Noida Ola Uber: नोएडा में ओला-उबर समेत ई-कॉमर्स कंपनियों के काफिले में बड़ा बदलाव, पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों की होगी छुट्टी

नोएडा। प्रदूषण पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिसका असर नोएडा में संचालित ओला, उबर समेत तमाम सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स कंपनियों पर पड़ेगा। अब इन कंपनियों के काफिले में चार पहिया और तीन पहिया पेट्रोल व डीजल से चलने वाले वाहनों को शामिल नहीं किया जा सकेगा। एक जनवरी से यह नियम प्रभावी हो गया है। इसके तहत केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और हाइब्रिड वाहनों को ही काफिले में संचालन की अनुमति दी जाएगी।

सरकार के इस फैसले से ओला, उबर, ब्लिंकिट, अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्विगी, जोमैटो जैसी सेवाओं से जुड़े हजारों वाहन प्रभावित होंगे। काफिले में शामिल पुराने पेट्रोल और डीजल वाहन अब सेवा से बाहर किए जाएंगे। हालांकि, दो पहिया वाहनों को इस नियम से छूट दी गई है। यानी ओला, रैपिडो, जोमैटो और अन्य फूड डिलीवरी या बाइक टैक्सी सेवाओं में सभी तरह के दो पहिया वाहन पहले की तरह संचालित होते रहेंगे।

आरटीओ प्रवर्तन डॉ. सियाराम वर्मा ने इस संबंध में एक वीडियो संदेश जारी कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय मुख्य रूप से शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। नोएडा और आसपास के इलाकों में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता को देखते हुए सरकार ने सेवा प्रदाता कंपनियों के वाहनों पर सख्ती करने का फैसला किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन और चार पहिया श्रेणी में केवल सीएनजी, ईवी और हाइब्रिड वाहन ही वैध माने जाएंगे।

आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, जिन कंपनियों के काफिले में अब भी पेट्रोल या डीजल से चलने वाले पुराने वाहन शामिल हैं, उन्हें तत्काल हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित सेवा प्रदाता और वाहन मालिकों पर कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके लिए परिवहन विभाग की टीम निगरानी करेगी और समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाएंगे।

इस फैसले से जहां एक ओर पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर वाहन चालकों और सेवा प्रदाताओं के सामने नई चुनौती भी खड़ी हो गई है। कई चालकों को अब अपने वाहन बदलने या सीएनजी, ईवी अथवा हाइब्रिड वाहनों की ओर शिफ्ट होने की जरूरत पड़ेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से आने वाले समय में शहर की हवा में सुधार देखने को मिलेगा और नोएडा को प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।

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