Digital Arrest Scam: नोएडा साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ठगी गिरोह से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार

Digital Arrest Scam: नोएडा साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ठगी गिरोह से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार
नोएडा में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को ठगने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी सीधे तौर पर ठगी की वारदात को अंजाम नहीं देते थे, बल्कि साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराकर अवैध रकम के लेनदेन में मदद करते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनमें कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है। जांच के दौरान इन मोबाइल फोन से ठगी के नेटवर्क और अन्य आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने पंजाब के लुधियाना जिले में दबिश देकर भावेश गुप्ता और हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी 21-21 वर्ष के हैं और लुधियाना के ही निवासी हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि भावेश गुप्ता 12वीं पास है और एक निजी कंपनी में नाइट शिफ्ट में काम करता था, जबकि हर्षित कुमार बीए का छात्र होने के साथ-साथ डिलीवरी ब्वॉय का काम करता था।
कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच ने दोनों युवकों को साइबर ठगों के नेटवर्क से जोड़ दिया। जांच में खुलासा हुआ कि ये आरोपी डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड को अंजाम देने वाले गिरोह को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। इसके बदले उन्हें हर ट्रांजेक्शन पर छह से दस प्रतिशत तक कमीशन मिलता था।
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के तहत ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे। वे पीड़ितों को किसी आपराधिक मामले में फंसाने या तुरंत गिरफ्तारी की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाते थे। इसके बाद जांच या क्लियरेंस के नाम पर उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी।
ऐसे ही एक मामले में इस गिरोह ने नोएडा के एक बुजुर्ग व्यक्ति को निशाना बनाया, जो एफसीआई से सेवानिवृत्त थे। आरोपियों के माध्यम से ठगों ने पीड़ित से करीब सात लाख रुपये की ठगी कर ली। इस रकम का एक हिस्सा आरोपियों के बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ, जिसमें से उन्होंने लगभग साढ़े चार लाख रुपये कमीशन के तौर पर प्राप्त किए।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों के खिलाफ देश के कई अन्य राज्यों में भी शिकायतें दर्ज हैं। तेलंगाना में दो और आंध्र प्रदेश में एक मामला सामने आया है, जिनमें ठगी की रकम इन्हीं खातों में भेजी गई थी। इससे साफ है कि यह गिरोह एक बड़े और संगठित साइबर नेटवर्क का हिस्सा था, जो कई राज्यों में सक्रिय होकर लोगों को निशाना बना रहा था।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के नाम भी उजागर किए हैं। पुलिस अब इन सुरागों के आधार पर पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह के तार किन बड़े साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े हैं।
नोएडा साइबर पुलिस का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगने वालों पर तुरंत भरोसा न करें और ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में इस तरह के गिरोहों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।





