NITI Aayog Health Report: खराब खान-पान से 56.4% बीमारियां, जीवनशैली में बदलाव बना बड़ा खतरा

NITI Aayog Health Report: खराब खान-पान से 56.4% बीमारियां, जीवनशैली में बदलाव बना बड़ा खतरा
देश में बढ़ती बीमारियों को लेकर एक चिंताजनक खुलासा सामने आया है। NITI Aayog में आयोजित 16वीं इंडिया प्रोबायोटिक संगोष्ठी में बताया गया कि भारत में करीब 56.4% बीमारियों का प्रमुख कारण खराब खान-पान है। विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते सेवन को इसके पीछे बड़ी वजह बताया है।
इस कार्यक्रम में Rajiv Gauba ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के चलते लोग पारंपरिक और पौष्टिक आहार से दूर होते जा रहे हैं। इसके कारण आंतों का माइक्रोबायोम प्रभावित हो रहा है, जो शरीर की इम्यूनिटी, मेटाबॉलिज्म और रोगों से लड़ने की क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर खान-पान की आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की योजनाएं जैसे Ayushman Bharat और Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है और आम लोगों के इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और मानव संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
राजीव गौबा ने सस्ती जेनेरिक दवाओं के उपयोग, डिजिटल हेल्थ सिस्टम, टेलीमेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका मानना है कि इन उपायों से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है।
संगोष्ठी में यह भी कहा गया कि प्रोबायोटिक्स और माइक्रोबायोम पर शोध तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन लोगों को इससे जुड़े भ्रामक दावों से सावधान रहना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी पारंपरिक फर्मेंटेड फूड संस्कृति के जरिए इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है, बशर्ते सही जानकारी और संतुलित आहार को अपनाया जाए।
यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अगर समय रहते खान-पान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और जागरूकता ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी बन सकते हैं।
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