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New Delhi : वडोदरा में महाशिवरात्रि पर शिव परिवार की महाआरती में शामिल हुए अमित शाह

New Delhi : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के वडोदरा में शिव परिवार की महाआरती में भाग लिया। इस दौरान अनेक गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब कोई पुण्यात्मा सच्चे मन से संकल्प करता है तो ईश्वर की कृपा से कठिन से कठिन संकल्प भी पूर्ण हो जाता है और कई बार वह एक परंपरा का रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि सुर सागर में स्थापित सर्वेश्वर महादेव की विराट प्रतिमा इसका जीवंत उदाहरण है, जो आज शिवरात्रि के अवसर पर चमत्कार की तरह सभी के समक्ष खड़ी है। उन्होंने बताया कि सावली वाले महाराज ने सुर सागर के मध्य भव्य शिव प्रतिमा की स्थापना, शिवरात्रि पर वडोदरा में भव्य शिव सवारी के आयोजन और गणेशजी की स्थापना के तीन संकल्प लिए थे, जो आज साकार रूप में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संकल्प को साकार करने में अनेक भक्तों की महत्वपूर्ण भूमिका रही और इसने पूरे वडोदरा शहर को एक सूत्र में बांध दिया।

अमित शाह ने कहा कि आज शिवरात्रि का उल्लेख काशी, कोयंबटूर, रामेश्वरम या गिर सोमनाथ कहीं भी हो, देशभर में सुर सागर के सर्वेश्वर महादेव का नाम गूंजता है। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक संकल्प, पुरुषार्थ और संतों के आशीर्वाद का परिणाम है कि यह सरोवर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया है।

उन्होंने कहा कि आज देश का शायद ही कोई गांव होगा जहां शिवरात्रि का उत्सव नहीं मनाया जा रहा हो। पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अपने स्वाभिमान के प्रतीकों को पुनः गौरवपूर्ण स्थान दिलाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में दशकों तक राम लला टेंट में विराजमान रहे, लेकिन अब भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित हैं। करोड़ों लोगों की भावना थी कि प्रभु राम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बने और आज यह संकल्प पूर्ण हुआ है।

उन्होंने कहा कि काशी में औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किए गए काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण आज भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के रूप में सामने है। इसी प्रकार सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग पर एक हजार वर्षों में कई आक्रमण हुए, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल, के. एम. मुंशी और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के संकल्प से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। आज सोमनाथ मंदिर आक्रांताओं पर विजय के प्रतीक के रूप में अटल खड़ा है।

उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर पहले हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने पर इस वर्ष ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है। महाकाल कॉरिडोर का पुनर्निर्माण हो या सांस्कृतिक धरोहरों का पुनरुत्थान, इन प्रयासों ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कहा कि गुलामी की निशानियों को हटाते हुए देश को सामूहिक हीन भावना से मुक्त करने का कार्य निरंतर जारी है।

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