दिल्ली

Medical Research Role India: देश के विकास में मेडिकल रिसर्च की अहम भूमिका, एलएचएमसी में पहला ‘इंस्टीट्यूट रिसर्च डे’ आयोजित

Medical Research Role India: देश के विकास में मेडिकल रिसर्च की अहम भूमिका, एलएचएमसी में पहला ‘इंस्टीट्यूट रिसर्च डे’ आयोजित

नई दिल्ली में स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल व कलावती सरन बाल अस्पताल में मंगलवार को पहली बार ‘इंस्टीट्यूट रिसर्च डे’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन कॉलेज के स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मेडिकल क्षेत्र में हो रहे शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना और नए विचारों को सामने लाना था। इस मौके पर विभिन्न विभागों द्वारा किए गए शोध कार्यों को प्रदर्शित किया गया, जिससे मेडिकल क्षेत्र में हो रही प्रगति की झलक देखने को मिली।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आईसीएमआर के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा कि किसी भी देश के समग्र विकास में मेडिकल रिसर्च की भूमिका बेहद अहम होती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि आईसीएमआर भविष्य में भी ऐसे संस्थानों को हर संभव सहयोग देता रहेगा ताकि शोध कार्यों को और अधिक बढ़ावा मिल सके। उन्होंने शोध के माध्यम से नई बीमारियों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं संस्थान की निदेशक डॉ. सरिता बेरी ने अपने संबोधन में कहा कि मेडिकल कॉलेजों में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में विभिन्न स्तरों पर शोध कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और छात्राओं को भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजनों से छात्रों में शोध के प्रति रुचि बढ़ती है और उन्हें अपने काम को प्रस्तुत करने का मंच मिलता है।
कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अंजू सेठ के अनुसार, इस कार्यक्रम में करीब 60 शोध पत्रों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें से बेहतरीन शोध कार्यों को पुरस्कृत भी किया गया। इसके अलावा तीन उत्कृष्ट शोध पत्रों की प्रस्तुति दी गई, जिसे उपस्थित विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने काफी सराहा। कार्यक्रम में मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुपम प्रकाश सहित अन्य विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ डॉक्टर और छात्राओं समेत 300 से अधिक लोग शामिल हुए। इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि मेडिकल क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और नई खोजों का मार्ग प्रशस्त हो सके।

भारत और पाकिस्तान टी20 विश्व कप 2024 में दो बार आमने-सामने हो सकते हैं। जानिए कैसे

Related Articles

Back to top button