
Indian Coast Guard Dornier 228: भारतीय तटरक्षक बल को मिलेंगे आठ डोर्नियर-228 विमान, रक्षा मंत्रालय ने एचएएल से 2,312 करोड़ रुपये का करार किया
नई दिल्ली, 12 फरवरी। समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 2,312 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस समझौते के तहत भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए आठ डोर्नियर-228 विमान खरीदे जाएंगे। यह सौदा ‘खरीदें (भारतीय)’ श्रेणी के अंतर्गत किया गया है, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन विमानों की आपूर्ति से भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। देश की लंबी समुद्री सीमा, तटीय क्षेत्रों और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी के लिए आधुनिक और विश्वसनीय विमानों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। डोर्नियर-228 विमानों की तैनाती से समुद्री गश्त, खोज एवं बचाव अभियान, निगरानी और आपदा राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
डोर्नियर-228 एक बहुउद्देश्यीय हल्का परिवहन विमान है, जिसे एचएएल द्वारा भारत में निर्मित किया जाता है। यह विमान अपनी कम दूरी से उड़ान भरने और उतरने की क्षमता, उच्च विश्वसनीयता और बहु-भूमिका संचालन के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग निगरानी, टोही, संचार, लॉजिस्टिक सपोर्ट और मानवीय सहायता अभियानों में किया जाता है। भारतीय तटरक्षक बल पहले से ही डोर्नियर विमानों का उपयोग कर रहा है, और नए विमानों के शामिल होने से बेड़े की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी।
इस सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे देश के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग को गति मिलेगी। एचएएल के माध्यम से इन विमानों का निर्माण होने से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही एमएसएमई और सप्लाई चेन से जुड़े अनेक उद्योगों को भी लाभ होगा। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तकनीकी कौशल का विकास होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरक्षा के मौजूदा परिदृश्य में निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता अत्यंत आवश्यक है। डोर्नियर-228 जैसे बहुउद्देश्यीय विमान तटरक्षक बल को तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, समुद्री प्रदूषण और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेंगे। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी इनकी अहम भूमिका रहती है।
‘खरीदें (भारतीय)’ श्रेणी के तहत किया गया यह अनुबंध विदेशी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में अधिकतम स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करना है। इस सौदे से न केवल भारतीय तटरक्षक बल की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी नया बल मिलेगा।
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