
Indian Army AI technology: इंडिया एआई समिट में भारतीय सेना की बड़ी पहल, अब 7 दिन पहले मिलेगी भूस्खलन और बाढ़ की चेतावनी
नई दिल्ली, 16 फरवरी। अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन से होने वाले भारी जान-माल के नुकसान को कम करने की दिशा में भारतीय सेना ने बड़ा कदम उठाया है। Indian Army ने इंडिया एआई समिट में स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया, जो सैन्य उपयोग के साथ-साथ नागरिक क्षेत्रों में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं।
सेना द्वारा प्रदर्शित प्रणालियों में ‘प्रक्षेपण’ नामक उन्नत सैन्य जलवायु एवं आपदा पूर्वानुमान प्रणाली खास आकर्षण का केंद्र रही। यह प्रणाली 3 से 7 दिन पहले भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन की सटीक चेतावनी देने में सक्षम है। इससे सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में तैनात जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। समय से पहले चेतावनी मिलने पर प्रशासन राहत और बचाव की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेगा।
सेना ने ‘एआई एग्जामिनर’ नामक स्वचालित मूल्यांकन प्रणाली, ‘एसएएम-यूएन’ रियल-टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस प्लेटफॉर्म और ‘एकम’ एआई-एज-ए-सर्विस क्लाउड जैसी तकनीकों का भी प्रदर्शन किया। ये सभी प्रणालियां डेटा आधारित निर्णय लेने और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में मददगार होंगी। सेना तेजी से डेटा-केंद्रित और एआई-सक्षम बल में रूपांतरित हो रही है।
ड्राइवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष एआई आधारित ड्राइवर थकान पहचान प्रणाली भी प्रदर्शित की गई, जो वाहन चलाते समय झपकी लेने या अत्यधिक थकान की स्थिति में ड्राइवर को तुरंत सतर्क कर सकती है। इससे सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त ‘एक्सफेस’ फेस रिकग्निशन सिस्टम, ‘नभ दृष्टि’ टेलीमेट्री प्लेटफॉर्म, ‘एआई इन बॉक्स’ पोर्टेबल एज प्लेटफॉर्म और एडवांस वाहन ट्रैकिंग सिस्टम भी प्रस्तुत किए गए। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में डीपफेक वीडियो डिटेक्शन, प्रोएक्टिव मोबाइल सिक्योरिटी और मशीन लर्निंग आधारित वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसी स्वदेशी तकनीकों ने भी ध्यान आकर्षित किया।
इन नवाचारों के माध्यम से भारतीय सेना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती दे रही है, बल्कि आपदा प्रबंधन, डिजिटल सुरक्षा और नागरिक सेवाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इन तकनीकों का व्यापक उपयोग देशभर में आपदा पूर्वानुमान और सार्वजनिक सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगा।
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