India defence deals 2026: 2.38 लाख करोड़ के प्रस्ताव मंजूर, सेना की ताकत होगी और मजबूत

India defence deals 2026: 2.38 लाख करोड़ के प्रस्ताव मंजूर, सेना की ताकत होगी और मजबूत
नई दिल्ली। भारत की सैन्य शक्ति को नई मजबूती देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बड़े फैसले लिए हैं। Defence Acquisition Council की बैठक में करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जबकि 858 करोड़ रुपये के अहम रक्षा सौदों पर भी मुहर लगी। यह बैठक रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में हुई, जिसमें सेना, वायुसेना और तटरक्षक बल की क्षमताओं को बढ़ाने पर फोकस किया गया।
मंजूर प्रस्तावों के तहत भारतीय सेना को एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, धनुष गन सिस्टम, हाई कैपेसिटी रेडियो रिले और एंटी-टैंक गोला-बारूद मिलेगा। इससे सेना की मारक क्षमता, संचार व्यवस्था और निगरानी तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। वहीं भारतीय वायुसेना को मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, S-400 missile system, रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट और SU-30 इंजन अपग्रेड की मंजूरी दी गई है, जिससे हवाई सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
भारतीय तटरक्षक बल के लिए हाई-स्पीड एयर कुशन व्हीकल्स खरीदने का निर्णय लिया गया है, जो समुद्री सुरक्षा और रेस्क्यू ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाएंगे। इसके साथ ही 858 करोड़ रुपये के दो बड़े रक्षा सौदों पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। भारतीय सेना के लिए रूस की कंपनी JSC Rosoboronexport से टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदा जाएगा, जिसकी लागत करीब 445 करोड़ रुपये है। यह सिस्टम दुश्मन के विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों से सुरक्षा देने में सक्षम है।
वहीं भारतीय नौसेना के P-8I maritime patrol aircraft के रखरखाव के लिए 413 करोड़ रुपये का समझौता Boeing India Defense Private Limited के साथ किया गया है। इस समझौते के तहत इन विमानों की मेंटेनेंस भारत में ही होगी, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है और 2.28 लाख करोड़ रुपये के 503 रक्षा सौदे किए जा चुके हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से न केवल सेना और वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा, बल्कि भारत की हवाई और समुद्री सुरक्षा भी पहले से अधिक मजबूत होगी। आधुनिक तकनीक और उन्नत हथियारों की उपलब्धता से देश भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेगा। साथ ही, देश में ही मेंटेनेंस और निर्माण को बढ़ावा मिलने से विदेशी निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी।





