Himachal Pradesh: ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा, बांधों में वाष्पीकरण और ग्लेशियर पिघलने पर वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश

Himachal Pradesh: ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा, बांधों में वाष्पीकरण और ग्लेशियर पिघलने पर वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश
शिमला, 12 जनवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को राज्य के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विभागों और उपक्रमों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति, भविष्य की चुनौतियों और पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि ऊर्जा विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न बांधों और जलाशयों में गर्मियों के दौरान होने वाले पानी के वाष्पीकरण का वैज्ञानिक और विस्तृत अध्ययन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में प्रदेश के कई शहरों में धुंध का बढ़ता स्तर गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि क्या बांधों और जलाशयों से होने वाले वाष्पीकरण का बादल फटने जैसी घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं। इस दिशा में गहन शोध और वैज्ञानिक विश्लेषण समय की मांग है, ताकि भविष्य की आपदाओं को समझा और रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की दर और उसके कारण उत्पन्न होने वाली बाढ़ जैसी परिस्थितियों के अध्ययन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों का पिघलना न केवल जल संसाधनों को प्रभावित करता है, बल्कि इससे पूरे पारिस्थितिक तंत्र और प्राकृतिक संतुलन पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में निर्माणाधीन विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट मीटर प्रणाली पर भी विस्तार से चर्चा की और फीडर बिलिंग की मैपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बिजली आपूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 13 जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिससे राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 1229 मेगावाट की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन को और बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और ऊर्जा विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करने का आह्वान किया।




