Himachal Irrigation Achievement: प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई गणना पूरी करने पर हिमाचल सम्मानित

Himachal Irrigation Achievement: प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई गणना पूरी करने पर हिमाचल सम्मानित
हिमाचल प्रदेश को सिंचाई क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है, जहां राज्य के जल शक्ति विभाग को भारत सरकार द्वारा सिंचाई गणना 2023-25 के तहत पहली बार प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई (एमएमआई) गणना सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल द्वारा विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन को प्रदान किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति सचिव वी.एल. कंथा राव भी उपस्थित रहे।
बाद में शिमला में मुख्य सचिव संजय गुप्ता और सचिव जल शक्ति डॉ. अभिषेक जैन ने यह सम्मान औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई परियोजनाएं कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और यह उपलब्धि डेटा-आधारित योजना, बेहतर प्रशासन और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार के इन प्रयासों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
एमएमआई गणना का उद्देश्य देशभर में सिंचाई से जुड़े आंकड़ों का एक व्यापक और विश्वसनीय डेटाबेस तैयार करना है। इस प्रक्रिया में 10,000 हेक्टेयर से अधिक कमांड क्षेत्र वाली परियोजनाओं को प्रमुख श्रेणी में और 2,000 से 10,000 हेक्टेयर के बीच की परियोजनाओं को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है।
हिमाचल प्रदेश में इस गणना के तहत कुल 10 प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया, जिनमें एक प्रमुख और नौ मध्यम परियोजनाएं हैं। इनमें से आठ परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि दो मध्यम परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 32 विभिन्न मानकों पर विस्तृत डेटा संग्रह किया गया, जिसमें सिंचाई क्षमता, फसल पैटर्न, लाभान्वित आबादी, जल उपयोग और कमांड एरिया विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहे।
विशेष बात यह रही कि जल शक्ति विभाग ने यह पूरा कार्य निर्धारित समयसीमा दिसंबर 2025 से पहले ही अक्टूबर 2025 तक पूरा कर लिया, जो विभाग के उत्कृष्ट समन्वय और कार्यकुशलता को दर्शाता है। वर्तमान में प्रमुख परियोजना की लगभग 64 प्रतिशत सिंचाई क्षमता का उपयोग हो रहा है, जबकि मध्यम परियोजनाओं में यह आंकड़ा करीब 84 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
इन परियोजनाओं का उपयोग मुख्य रूप से खरीफ और रबी फसलों के लिए किया जा रहा है, साथ ही अन्य फसलों के लिए भी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई क्षमता के बेहतर उपयोग और आधुनिक तकनीकों के समावेश से राज्य की कृषि उत्पादकता में और वृद्धि की जा सकती है।





