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Health News: खाने का सही समय बना सेहत सुधारने का नया मंत्र, मेडिकल स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

Health News: खाने का सही समय बना सेहत सुधारने का नया मंत्र, मेडिकल स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

नई मेडिकल स्टडी में सामने आया है कि सिर्फ क्या खाना है यह ही नहीं, बल्कि कब खाना है यह भी अच्छी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं का कहना है कि तय समय सीमा में भोजन करने की आदत वजन नियंत्रित करने, मेटाबॉलिज्म सुधारने और शरीर को कई बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। खासतौर पर रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए यह तरीका बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित इस अध्ययन में टाइम-रिस्ट्रिक्टेड फीडिंग (टीआरएफ) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। टीआरएफ का मतलब है कि व्यक्ति दिन के केवल तय समय के भीतर भोजन करे और बाकी समय उपवास रखे। उदाहरण के तौर पर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक भोजन करना और उसके बाद कुछ न खाना।

शोधकर्ताओं प्रोफेसर मदन एम गोडबोले और प्रोफेसर नेवैद्य चट्टोपाध्याय के अनुसार यह अध्ययन रजोनिवृत्ति जैसी स्थिति वाले चूहों पर किया गया। जिन चूहों ने बिना किसी समय सीमा के भोजन किया, उनमें शरीर की चर्बी लगभग 37 प्रतिशत तक बढ़ गई। इसके साथ ही ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ गया, सूजन बढ़ी और हड्डियों व मांसपेशियों की कमजोरी भी देखने को मिली।

इसके विपरीत जिन चूहों को तय समय सीमा के भीतर भोजन दिया गया, उनमें वजन बढ़ना लगभग रुक गया। स्टडी में पाया गया कि ब्लड शुगर कंट्रोल में करीब 26 प्रतिशत तक सुधार हुआ। साथ ही शरीर की सूजन कम हुई और हड्डियां व मांसपेशियां भी सुरक्षित रहीं। विशेषज्ञों के अनुसार टीआरएफ शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम करता है।

अध्ययन में टाइम-रिस्ट्रिक्टेड फीडिंग की तुलना वजन घटाने वाली दवा Liraglutide से भी की गई। परिणामों में पाया गया कि टीआरएफ का असर दवा के बराबर था, जबकि हड्डियों और मांसपेशियों की सुरक्षा के मामले में यह तरीका अधिक प्रभावी साबित हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, ऑस्टियोपोरोसिस और मांसपेशियों की कमजोरी का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में टाइम-रिस्ट्रिक्टेड फीडिंग एक आसान, कम खर्चीला और असरदार विकल्प बनकर सामने आ रहा है।

डॉक्टरों के मुताबिक जब भोजन दिन के सक्रिय समय यानी डे-टाइम में किया जाता है, तो शरीर शुगर का बेहतर उपयोग करता है। इससे हार्मोन संतुलित रहते हैं, सूजन कम होती है और शरीर की ऊर्जा प्रणाली बेहतर ढंग से काम करती है।

हालांकि यह अध्ययन अभी पशुओं पर आधारित है, लेकिन इसके परिणामों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ बेहद उत्साहजनक मान रहे हैं। उनका मानना है कि भविष्य में यह तरीका मेनोपॉज से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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