
Delhi Declaration 2025: विश्व स्वास्थ्य संगठन का ‘दिल्ली घोषणापत्र’ पारंपरिक चिकित्सा में नए युग की शुरुआत
नई दिल्ली। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक परिदृश्य को नई दिशा देने वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के दौरान जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ ने एकीकृत चिकित्सा (Integrative Medicine) में ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत कर दी है। इस घोषणापत्र के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा को सुरक्षित, प्रभावी और साक्ष्य-आधारित रूप में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करने की सिफारिश की गई है, विशेषकर प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने के लिए।
19 दिसंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस, स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव मौजूद थे। इस घोषणापत्र को तैयार करने में 100 से अधिक देशों के स्वास्थ्य नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और पारंपरिक चिकित्सा के अन्य हितधारकों ने योगदान दिया।
पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा कि पहले पारंपरिक चिकित्सा को केवल वेलनेस और जीवन-शैली तक सीमित समझा जाता था, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। गंभीर परिस्थितियों में भी पारंपरिक चिकित्सा प्रभावी भूमिका निभा सकती है। भारत इस सोच के तहत पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक कैंसर उपचार और अन्य आधुनिक चिकित्सा विधियों के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इस पहल से साक्ष्य-आधारित दिशा-निर्देश तैयार करने में मदद मिलेगी और स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
‘दिल्ली घोषणापत्र’ वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा की मान्यता बढ़ाने और इसे सुरक्षित, वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित तरीकों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से विश्वभर में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका और प्रभाव बढ़ाने की उम्मीद है।





