CJP Protest Case: अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 5 लाख के बॉन्ड वाला नोटिस वापस
नोएडा। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सोमवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 4 सितंबर 2026 को अक्षत त्रिपाठी को जारी किया गया पांच लाख रुपये के निजी बॉन्ड वाला नोटिस वापस लिया जा चुका है। सरकार की इस जानकारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उक्त नोटिस के आधार पर अतीत में की गई कोई भी कार्रवाई निरस्त मानी जाएगी और भविष्य में भी उसके आधार पर अक्षत के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अक्षत त्रिपाठी को यह नोटिस ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित CJP प्रदर्शन के सिलसिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS के तहत जारी किया गया था। नोटिस में उनसे शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी बॉन्ड भरने और पांच-पांच लाख रुपये के दो जमानती पेश करने को कहा गया था। इसके साथ ही उन्हें निर्धारित अवधि तक शांति भंग न करने से संबंधित प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा गया था।
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद शीर्ष अदालत ने इस नोटिस को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। अक्षत की ओर से दायर याचिका में 4 सितंबर के नोटिस और उसके आधार पर शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दिए गए आदेशों के बावजूद उनके खिलाफ निवारक कार्रवाई शुरू की गई।
सोमवार की सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 4 सितंबर का विवादित नोटिस पहले ही वापस लिया जा चुका है। सरकार की ओर से यह जानकारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि नोटिस के आधार पर यदि अतीत में कोई कार्रवाई की गई है तो उसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा।
अदालत ने साफ किया कि 4 सितंबर के नोटिस के आधार पर अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आदेश से नोटिस को लेकर चल रही प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो गई है और छात्र को तत्काल राहत मिली है।
मामले की पृष्ठभूमि गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलन और CJP से जुड़े प्रदर्शनों से संबंधित है। अक्षत त्रिपाठी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अन्य छात्रों को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ BNSS की निवारक धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी।
पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, अक्षत की गतिविधियों के कारण विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति पैदा होने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। हालांकि अक्षत ने इन आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था। उन्होंने अपने खिलाफ जारी बॉन्ड नोटिस को अनुचित बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
4 सितंबर को जारी नोटिस में पांच लाख रुपये के निजी मुचलके के अलावा समान राशि के दो जमानती मांगे गए थे। नोटिस में यह प्रक्रिया शांति बनाए रखने के लिए निवारक कदम के तौर पर शुरू की गई थी। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद इसकी वैधता और पहले से दिए गए न्यायिक निर्देशों के संदर्भ में सवाल उठे।
इस मामले में पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के संदर्भ में अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए थे। इसी पृष्ठभूमि में अक्षत को नोटिस जारी किए जाने पर अदालत ने प्रशासनिक प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन को लेकर सवाल उठाए थे।
अदालत के समक्ष अब उत्तर प्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि विवादित नोटिस वापस लिया जा चुका है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस के आधार पर की गई किसी भी पिछली कार्रवाई को समाप्त मानने का निर्देश दिया। साथ ही भविष्य में उस नोटिस के आधार पर कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाने का आदेश भी दिया।
मामले में यह भी सामने आया कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हुई थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से संबंधित मामले में एक उपनिरीक्षक के निलंबन की जानकारी दी गई थी। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के संदर्भ में की गई बताई गई थी।
अक्षत त्रिपाठी को मिली राहत फिलहाल 4 सितंबर के नोटिस और उससे जुड़ी कार्रवाई तक सीमित है। CJP से जुड़े अन्य मामलों में यदि कोई अलग कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो उसका प्रभाव इस आदेश से स्वतः समाप्त नहीं होता। हालांकि, इस विशेष नोटिस के आधार पर अक्षत के खिलाफ अब कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ पांच लाख रुपये के निजी बॉन्ड और दो जमानतदारों की शर्त वाला विवादित नोटिस प्रभावी नहीं रह गया है। अदालत ने इसके आधार पर पहले की गई किसी भी कार्रवाई को भी निरस्त मानने का निर्देश दिया है।


