Greater Noida Bus Fire: 15 दिन से खराब था बस का AC, चालकों-परिचालक की पूछताछ में लापरवाही का खुलासा
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग में नौ यात्रियों की मौत के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच में बस के रखरखाव और संचालन से जुड़ी कथित लापरवाही का एक अहम पहलू सामने आया है। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार किए गए दोनों चालकों पवन और योगेश तथा परिचालक रोहित ने बताया कि बस का एसी सिस्टम करीब 15 दिनों से खराब था। आरोप है कि एसी की खराबी की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को देने के बावजूद उसे समय पर ठीक नहीं कराया गया और बस का संचालन जारी रखा गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में चालकों और परिचालक ने बताया कि उन्होंने कई बार बस का एसी ठीक कराने के लिए मैनेजर और अन्य जिम्मेदार लोगों से कहा था। उनके मुताबिक, एसी की खराबी के बावजूद बस को चलाया जाता रहा। यह कहकर मामले को टाल दिया गया कि गर्मी का मौसम जल्द समाप्त होने वाला है। इसी वजह से बस की मरम्मत नहीं कराई गई और यात्रियों को लेकर उसका संचालन जारी रहा।
जांच के इसी पहलू को गंभीर मानते हुए पुलिस ने बुकिंग मैनेजर विकास को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बस की तकनीकी खराबी की जानकारी किन-किन लोगों को थी और एसी की मरम्मत कराने की जिम्मेदारी किसकी थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बस को तकनीकी समस्या के बावजूद सड़क पर चलाने का फैसला किस स्तर पर लिया गया।
हादसे के बाद पुलिस की जांच केवल आग लगने के कारण तक सीमित नहीं है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आग लगने के बाद बस को रोकने में कितना समय लगा और उस दौरान बस कितनी दूरी तक चलती रही। पुलिस इसके लिए जीरो प्वाइंट से घटनास्थल तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।
सीसीटीवी फुटेज के अलावा बस की संभावित गति की भी जांच की जा रही है। पुलिस मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है, ताकि हादसे के समय बस की वास्तविक गतिविधियों और उससे जुड़े लोगों की स्थिति की जानकारी हासिल की जा सके। यात्रियों के बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि आग लगने के बाद यात्रियों को बस से बाहर निकलने के लिए कितना समय मिला। हादसे के दौरान बस में अफरातफरी मच गई थी। कुछ यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की, जबकि कुछ यात्रियों ने दरवाजे के रास्ते निकलकर अपनी जान बचाई। हालांकि, कई यात्री बस के अंदर ही फंस गए और आग की चपेट में आ गए।
नौ यात्रियों की मौत के बाद अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आग लगने के शुरुआती क्षणों में बस में क्या हुआ था। आग किस हिस्से से शुरू हुई, बस के भीतर धुआं कितनी तेजी से फैला, चालक और परिचालक को इसकी जानकारी कब मिली और बस को रोकने में कितना समय लगा, इन सभी सवालों के जवाब जांच के जरिए जुटाए जा रहे हैं।
बस के तकनीकी रखरखाव से जुड़े दस्तावेज भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस यह देख सकती है कि वाहन की अंतिम सर्विस कब हुई थी, एसी की खराबी की शिकायत कब दर्ज कराई गई और उसे ठीक कराने के लिए कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं। इसके अलावा बस के अन्य तकनीकी उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हादसे से पहले बस किन स्थानों पर रुकी थी और चालक तथा परिचालक की गतिविधियां क्या थीं। यात्रियों से मिली जानकारी और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान करके हादसे की पूरी समयरेखा तैयार की जा रही है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि आग लगने से लेकर बस रुकने तक घटनाक्रम किस क्रम में हुआ।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार चालकों और परिचालक से लगातार पूछताछ की जा रही है। उनके बयानों की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य दस्तावेजों से की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जाएगी।
बस के एसी की खराबी को लेकर सामने आई जानकारी ने वाहन संचालन में तकनीकी सुरक्षा और रखरखाव की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी वाहन में लंबे समय से तकनीकी खराबी की जानकारी होने के बावजूद उसे यात्रियों के साथ सड़क पर चलाया जाता रहा हो, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
फिलहाल पुलिस हादसे के सभी पहलुओं को जोड़कर जांच कर रही है। नौ यात्रियों की मौत से जुड़े इस मामले में तकनीकी खराबी, बस की गति, आग लगने के बाद वाहन रोकने में लगा समय और यात्रियों को बाहर निकलने के लिए मिले समय की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी रिकॉर्ड सामने आने के बाद हादसे की पूरी तस्वीर और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।


