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AIIMS Delhi: Medical Innovation को नई दिशा, सहयोग की संभावनाएं तलाशने एम्स पहुंचा ईयू प्रतिनिधिमंडल

AIIMS Delhi: Medical Innovation को नई दिशा, सहयोग की संभावनाएं तलाशने एम्स पहुंचा ईयू प्रतिनिधिमंडल

नई दिल्ली, 8 फरवरी। भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मेडिकल इनोवेशन, स्टार्टअप एंटरप्राइज और डीप रिसर्च के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाओं को तलाशने के लिए यूरोपियन यूनियन का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल एम्स दिल्ली पहुंचा। इस दौरे को भारत-ईयू संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद।

यूरोपियन कमीशन की इनोवेशन, प्रॉस्पेरिटी और इंटरनेशनल कोऑपरेशन की डिप्टी डायरेक्टर जनरल मारिया क्रिस्टीना रूसो ने शनिवार को एम्स दिल्ली के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संकेत दिए कि भारत और यूरोपियन यूनियन मिलकर हेल्थकेयर इनोवेशन, बायोमेडिकल रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में साझा प्रयास करेंगे, जिससे दोनों पक्षों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

दौरे के दौरान सीएमआईई के माध्यम से चयनित छह भारतीय हेल्थ स्टार्टअप्स ने अपने नवाचारों, तकनीकी समाधानों और यूरोपियन यूनियन में संभावित पार्टनरशिप व विस्तार की योजनाओं को प्रस्तुत किया। इन स्टार्टअप्स ने बताया कि किस तरह भारतीय मेडिकल इनोवेशन वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल सकता है और यूरोपियन बाजार में नई संभावनाएं खोल सकता है। ईयू प्रतिनिधिमंडल ने इन प्रस्तुतियों में विशेष रुचि दिखाई और भविष्य में सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

एम्स दिल्ली के निदेशक प्रो. एम. श्रीनिवास ने कहा कि भारत में बायोमेडिकल इनोवेशन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और एम्स ऐसे सभी प्रयासों को सुविधाजनक बनाने में पूर्ण सहयोग करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एम्स न केवल रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स में बल्कि स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में भी सेतु की भूमिका निभाएगा।

उच्च स्तरीय वार्ता के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यूरोपियन यूनियन और भारत दोनों ही बायोमेडिकल और क्लिनिकल रिसर्च पार्टनरशिप को नई मजबूती देना चाहते हैं। दोनों पक्षों का फोकस इनोवेटर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप्स को ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने पर है, जिससे वे दोनों क्षेत्रों में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर सकें और वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान निकाल सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईयू प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब भारत हेल्थकेयर इनोवेशन और मेडिकल स्टार्टअप्स के लिए एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र बन रहा है। यह साझेदारी न केवल रिसर्च और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देगी, बल्कि मरीजों के लिए बेहतर, किफायती और उन्नत इलाज के नए रास्ते भी खोलेगी।

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