Supertech Projects: 21 महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं, खरीदारों का प्रदर्शन; संसद मार्च और जंतर-मंतर आंदोलन की चेतावनी
नोएडा। सुपरटेक की अधूरी परियोजनाओं में निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से नाराज घर खरीदारों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और एनसीएलएटी के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होने का आरोप लगाते हुए शनिवार को बड़ी संख्या में खरीदारों ने सेक्टर-96 स्थित सुपरटेक के ई-स्क्वायर परियोजना कार्यालय पर प्रदर्शन किया। खरीदारों का कहना है कि करीब 21 महीने बीत जाने के बावजूद निर्माण की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने जल्द काम शुरू नहीं होने पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, संसद मार्च और दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
प्रदर्शन में शामिल खरीदारों के मुताबिक सुपरटेक की 16 अधूरी परियोजनाओं का निर्माण पूरा कराने की जिम्मेदारी सरकारी निर्माण एजेंसी एनबीसीसी को दी गई है। इसके बावजूद संबंधित परियोजनाओं में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। खरीदार लंबे समय से अपने घरों के पूरा होने, कब्जा मिलने और रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं।
खरीदारों ने आरोप लगाया कि अदालत और ट्रिब्यूनल की ओर से समय-सीमा निर्धारित किए जाने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं किया गया। इससे उन हजारों परिवारों की परेशानी बढ़ रही है, जिन्होंने वर्षों पहले इन परियोजनाओं में अपनी जमा पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे थे।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार एनसीएलएटी ने दिसंबर 2024 में एनबीसीसी को टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद मई 2025 से निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया था। उनका आरोप है कि निर्धारित समय पर काम शुरू नहीं होने के बाद मामला आगे बढ़ा और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एनसीएलएटी ने मई 2026 में एक और समय-सीमा तय की। इसके तहत जुलाई 2026 तक निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन खरीदारों का कहना है कि यह समय-सीमा भी निकल चुकी है।
नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने आरोप लगाया कि परियोजनाओं को एपेक्स कमेटी के अधीन करने और एनबीसीसी को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में जिम्मेदारी मिलने के करीब 21 महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है। उनका दावा है कि स्थिति यह है कि परियोजनाओं में एक ईंट तक नहीं लगी और आवश्यक टेंडर प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी।
खरीदारों ने परियोजनाओं से जुड़े खर्च और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हर महीने समिति के पारिश्रमिक, कंसल्टेंसी और एमिकस क्यूरी की फीस सहित विभिन्न मदों में खरीदारों के पैसे से बड़ी रकम खर्च हो रही है, जबकि निर्माण स्थल पर उन्हें कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। प्रदर्शन के दौरान खरीदारों ने एपेक्स कमेटी और एमिकस क्यूरी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
खरीदारों की मांग है कि सुपरटेक की सभी 16 अधूरी परियोजनाओं में निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक परियोजना के लिए निर्माण पूरा होने, फ्लैट का कब्जा मिलने और रजिस्ट्री कराने की स्पष्ट तथा पारदर्शी समय-सीमा सार्वजनिक की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे वर्षों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं और अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं करेंगे। यदि संबंधित एजेंसियों की ओर से जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। खरीदारों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने और संसद तक मार्च निकालने की चेतावनी दी है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा दोबारा खटखटाने की बात भी कही गई।
खरीदारों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी एजेंसी के खिलाफ आंदोलन करना नहीं, बल्कि अपने वर्षों से लंबित घर हासिल करना है। उन्होंने मांग की कि अदालत के निर्देशों का समयबद्ध तरीके से पालन कराया जाए और निर्माण से संबंधित प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय तथा प्रगति की जानकारी घर खरीदारों के साथ साझा की जाए।
प्रदर्शन के दौरान नेफोवा उपाध्यक्ष दीपांकर कुमार, संजीव सक्सेना, नीरज श्रीवास्तव, शेष मणि सिंह, पंकज दुबे, सनी सिंह, अखिलेश प्रसाद सिंह, अमित सिंह, नितिन त्यागी और बीएन गुप्ता समेत कई घर खरीदार और संगठन से जुड़े लोग मौजूद रहे।


