Chandigarh : अकाली दल-भाजपा का गठबंधन बेनकाब, सुखबीर बादल बेअदबी के केसों से बचने के लिए पंजाब के हितों से समझौता कर रहे हैं- रणबीर सिंह ढींडसा

Chandigarh : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रवक्ता रणबीर सिंह ढींडसा ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि एसआईटी द्वारा बुलाए जाने के बावजूद वह आज फिर गैरहाजिर रहना यह स्पष्ट करता है कि वह बेअदबी, बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड जैसे गंभीर मुद्दों पर कितने गंभीर हैं।

शुक्रवार को मोड़ा सिंह अंजान और प्रो. रिपनदीप सिंह के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ढींडसा ने सुखबीर बादल और शिरोमणि अकाली दल की पूरी लीडरशिप से दो सीधे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि आपके लिए दुनियावी अदालतें ज़्यादा ज़रूरी हैं या हमारे सुप्रीम श्री अकाल तख्त साहिब? हमारे गुरु साहिब द्वारा स्थापित श्री अकाल तख्त साहिब दुनियावी अदालतों से कहीं ज़्यादा पवित्र और सुप्रीम है, जहां हर सिख और पंजाबी के मन में बहुत श्रद्धा और सम्मान है। जब जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ने सुखबीर बादल को बुलाया था, तो उन्होंने कबूल किया था कि शांति से जाप कर रही संगत पर बेअदबी और गोलीकांड के लिए वह ज़िम्मेदार थे। उनकी पूरी कैबिनेट को गुरु मर्यादा के अनुसार सज़ा दी गई थी। अगर आप गुरु के उस सबसे बड़े दरबार में अपना गुनाह कबूल करके आए हैं, तो आज एसआईटी के सामने सच बताने से कैसे मना कर सकते हैं? गुरु और पंथक स्टैंड के प्रति आपकी श्रद्धा कहां चली गई?

दूसरा बड़ा सवाल उठाते हुए आप नेता ने कहा कि पूर्व गृह मंत्री के तौर पर सुखबीर बादल ने दावा किया था कि गोलीकांड वाले दिन वह विदेश में थे। जबकि फरीदकोट कोर्ट के रिकॉर्ड और उनकी अपनी रिट पिटीशन के मुताबिक, वह उस रात एक फाइव स्टार होटल में बैठकर सीनियर पुलिस अधिकारियों के लगातार संपर्क में थे। गृह मंत्री के तौर पर जब पूरी रात बातचीत चल रही थी, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह अकाली दल और भाजपा की आपसी मिलीभगत है, जिससे उनका पंजाब विरोधी, पंथ विरोधी और सिख विरोधी चेहरा पूरी तरह से सामने आ गया है।

ढींडसा ने आगे खुलासा किया कि सुखबीर बादल के आज एसआईटी के सामने पेश न होने का मुख्य कारण दिल्ली (भाजपा) के बड़े नेताओं के साथ हो रहा समझौता है। उन्हें दिल्ली से अर्जी मिली है कि उन्हें पेश होने की जरूरत नहीं है, हम उन्हें बेअदबी के मामलों से बचाएंगे। इस सुरक्षा के बदले सुखबीर बादल ने पंजाब के हितों के लिए डील की है और काले कानूनों पर भाजपा का साथ देने के लिए तैयार हो गए हैं।

 

उन्होंने कहा कि 2020 में दिखावे के लिए तोड़ा गया समझौता असल में कभी नहीं टूटा। चाहे राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को वोट देना हो या संसद में बिल पास करवाने के लिए अपने इकलौते सांसद को वोट देना हो, अकाली दल हमेशा भाजपा के साथ खड़ा रहा। एमएसपी, काले कानून या सिख मुद्दों पर उनकी शर्तें आज कहां चली गईं? आज उनके लिए बस यही मायने रखता है कि बेअदबी के इल्ज़ाम और सज़ा से कैसे बचा जाए।

रणबीर सिंह ढींडसा ने सभी पंजाबियों से इस साज़िश से सावधान रहने की अपील की। खुद को और अपने परिवारों को बचाने के लिए अकाली दल लीडरशिप ने पहले पूरी पार्टी को खत्म कर दिया और अब पंजाब के हितों को भाजपा के हाथों बेच दिया है। पंजाब के हर नागरिक को यह सवाल बादलों से पूछना चाहिए और दुनिया के सामने उनका पंजाब विरोधी चेहरा बेनकाब करना

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img