Garbhini Mitra Course: गर्भवती महिलाओं की देखभाल में आयुर्वेदिक सहारा, AIIA ने शुरू किया छह महीने का विशेष प्रशिक्षण
नई दिल्ली। गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) ने नई पहल की है। संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘गर्भिणी मित्र’ कोर्स शुरू किया है। छह महीने के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे मातृ स्वास्थ्य सहयोगी तैयार किए जाएंगे, जो गर्भवती महिलाओं को खानपान, जीवनशैली, सुरक्षित योग, भावनात्मक सहयोग और नवजात शिशु की शुरुआती देखभाल से जुड़ी जानकारी दे सकेंगे।
राजधानी दिल्ली के सरिता विहार स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में इस कोर्स का संचालन किया जाएगा। प्रत्येक बैच में केवल 20 सीटें निर्धारित की गई हैं। कोर्स के लिए 12वीं पास और 18 वर्ष से अधिक आयु के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई है।
छह महीने के प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में महिलाओं की जरूरतों को समझने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें गर्भवती महिला के खानपान और पोषण से लेकर स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने तक के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित तरीके से किए जा सकने वाले योग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण में प्रसव के दौरान गर्भवती महिला को भावनात्मक रूप से सहयोग देने के तरीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को शारीरिक बदलावों के साथ मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित ‘गर्भिणी मित्र’ महिला को आवश्यक सहयोग और स्वास्थ्य संबंधी सामान्य मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकेंगे।
कोर्स में प्रसव के बाद मां की देखभाल के साथ नवजात शिशु की शुरुआती देखभाल से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य मातृ और शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और परिवारों को सही समय पर उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में सहयोग देना है।
एआईआईए ने स्पष्ट किया है कि ‘गर्भिणी मित्र’ कोर्स का उद्देश्य डॉक्टर, नर्स या अन्य प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की जगह लेना नहीं है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लोगों की भूमिका स्वास्थ्य सहयोगी की होगी। उन्हें गर्भावस्था के दौरान सामने आने वाले संभावित चेतावनी संकेतों को पहचानने के बारे में भी बताया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिला को समय रहते अस्पताल या योग्य चिकित्सक के पास भेजा जा सके।
इस पहल के जरिए संस्थान आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य ज्ञान और आधुनिक मातृ स्वास्थ्य जरूरतों के बीच सहयोग की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान संतुलित खानपान, उचित दिनचर्या और सुरक्षित गतिविधियों के प्रति महिलाओं और उनके परिवारों में जागरूकता बढ़ाना प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
छह महीने का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थी मातृ स्वास्थ्य सहयोगी के रूप में गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को जागरूक करने में भूमिका निभा सकेंगे। सीमित सीटों को देखते हुए इच्छुक अभ्यर्थियों को 31 अगस्त तक आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।


