Chemical Industry: 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का होगा भारत का केमिकल सेक्टर, वैश्विक निवेश और घरेलू विनिर्माण बढ़ाने पर जोर

Chemical Industry: 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का होगा भारत का केमिकल सेक्टर, वैश्विक निवेश और घरेलू विनिर्माण बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली। भारत को दुनिया के प्रमुख केमिकल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित सीईओ राउंडटेबल में वर्ष 2040 तक देश के केमिकल सेक्टर को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में घरेलू विनिर्माण बढ़ाने के साथ वैश्विक निवेश आकर्षित करने, अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने और उद्योगों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

सीईओ राउंडटेबल में 30 से अधिक प्रमुख भारतीय और वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भारत में केमिकल सेक्टर के तेजी से विस्तार के लिए निवेश, अनुसंधान एवं विकास, आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और नियामकीय प्रक्रियाओं से संबंधित सुझाव सरकार के सामने रखे।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों के बीच भारत के पास केमिकल और पेट्रोकेमिकल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनने का बड़ा अवसर है। इसके लिए देश में बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता विकसित करने के साथ निवेशकों को प्रतिस्पर्धी और सुविधाजनक कारोबारी माहौल उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।

उद्योग प्रतिनिधियों ने पेट्रोलियम, केमिकल्स एंड पेट्रोकेमिकल्स इन्वेस्टमेंट रीजन यानी पीसीपीआईआर को आधुनिक और विश्वस्तरीय केमिकल हब के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। इन क्षेत्रों में बेहतर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और अन्य आवश्यक औद्योगिक सुविधाएं विकसित कर बड़े निवेश आकर्षित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

बैठक में बड़े औद्योगिक निवेश के लिए वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन की आवश्यकता भी उठाई गई। उद्योग जगत का कहना था कि बड़े पैमाने पर नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करने और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए ऐसी नीतियां जरूरी हैं, जो निवेश को आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक बना सकें।

केमिकल सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने पर भी विशेष चर्चा हुई। कंपनियों ने आरएंडडी में निवेश बढ़ाने, आधुनिक तकनीक विकसित करने और उद्योग तथा शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इससे देश में नई तकनीकों के विकास के साथ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं को भारत की ओर आकर्षित करने का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि अत्याधुनिक केमिकल मैन्युफैक्चरिंग और अनुसंधान के लिए कुशल पेशेवरों और वैज्ञानिकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। इसके लिए प्रतिभाओं को आकर्षित करने और देश में कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान देने की जरूरत है।

उद्योग जगत ने राष्ट्रीय फीडस्टॉक नीति तैयार करने की मांग भी रखी। केमिकल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, उसकी कीमत और निर्बाध आपूर्ति उत्पादन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को सीधे प्रभावित करती है। ऐसे में दीर्घकालिक और स्थिर फीडस्टॉक व्यवस्था को सेक्टर के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

इसके अलावा उद्योगों को अलग-अलग स्तर पर मिलने वाली मंजूरियों की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए प्रभावी सिंगल-विंडो व्यवस्था पर जोर दिया गया। इससे परियोजनाओं को शुरू करने में लगने वाला समय कम करने और निवेश प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उद्योग जगत से मिले सुझावों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने का भरोसा दिया। सरकार का लक्ष्य नीतिगत सुधार, निवेश, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और घरेलू उत्पादन क्षमता के विस्तार के जरिए भारत के केमिकल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

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