Power Supply: नोएडा में दिवाली तक सात बिजली उपकेंद्र होंगे शुरू, करीब 30 सेक्टरों को मिलेगी राहत
नोएडा में बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए दिवाली तक सात नए बिजली उपकेंद्र शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन उपकेंद्रों से संबंधित निर्माण और अन्य कार्य अंतिम चरण में पहुंच गए हैं। फिलहाल ट्रांसफार्मर स्थापित करने और अर्थिंग का काम किया जा रहा है। विद्युत निगम को उम्मीद है कि इन उपकेंद्रों के चालू होने से आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले हजारों उपभोक्ताओं को बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलेगी। नए उपकेंद्रों के शुरू होने से बिजली वितरण व्यवस्था मजबूत होगी और मौजूदा उपकेंद्रों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार भी कम किया जा सकेगा।
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता तकनीकी विवेक कुमार पटेल ने बताया कि एनएसईजेड, सेक्टर-80 के सी ब्लॉक, सेक्टर-132, सेक्टर-8, सेक्टर-65 और सेक्टर-94 में 33/11 केवी क्षमता के बिजली उपकेंद्र बनाए जा रहे हैं। इन स्थानों पर तैयार किए जा रहे सात उपकेंद्रों से आसपास के लगभग 30 सेक्टरों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रत्येक उपकेंद्र में 10-10 एमवीए क्षमता के दो-दो ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं। इन ट्रांसफार्मरों की मदद से बिजली वितरण का भार संभालने और जरूरत के अनुसार उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
अधीक्षण अभियंता के मुताबिक, नए उपकेंद्रों के चालू होने से आसपास के मौजूदा बिजली उपकेंद्रों पर भी भार कम हो जाएगा। वर्तमान में बिजली की बढ़ती मांग के कारण वितरण नेटवर्क के कुछ हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नए उपकेंद्र इस दबाव को अलग-अलग स्थानों पर बांटने में मदद करेंगे। इससे ट्रांसफार्मरों पर अधिक भार पड़ने की स्थिति कम हो सकती है और उनके खराब होने या फुंकने की आशंका भी घट सकती है। विद्युत निगम का उद्देश्य बिजली व्यवस्था की क्षमता बढ़ाकर उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक स्थिर आपूर्ति उपलब्ध कराना है।
विवेक कुमार पटेल ने बताया कि दिवाली तक सात नए उपकेंद्र शुरू करने के बाद निगम ने अतिरिक्त 12 बिजली उपकेंद्रों को भी मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा है। बिजली वितरण से जुड़े ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर बिजली नेटवर्क की क्षमता में बढ़ोतरी होगी और अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली की मांग को बेहतर तरीके से संभालने में सहायता मिलेगी। नए उपकेंद्रों के संचालन से उपभोक्ताओं को होने वाली बार-बार की कटौती से राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि वास्तविक आपूर्ति स्थानीय नेटवर्क और परिचालन परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।


