
New Delhi : दिल्ली सरकार ने राजधानी की सड़कों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित व्यय वित्त समिति ईएफसी की बैठक में 270.63 किलोमीटर लंबाई की विभिन्न सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए 657.99 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। रेखा गुप्ता ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से राजधानी की सड़कों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर बनाया जाएगा। इस निर्णय से पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली के अनेक प्रमुख मार्गों की गुणवत्ता में सुधार होगा और सड़क अवसंरचना को आधुनिक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया जा सकेगा।
ईएफसी की बैठक में लोक निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। रेखा गुप्ता ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के पूर्वी मेंटेनेंस जोन में 58.292 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर 147.08 करोड़ रुपये, उत्तरी मेंटेनेंस जोन में 104.42 किलोमीटर लंबी सड़कों पर 247.31 करोड़ रुपये और दक्षिणी मेंटेनेंस जोन में 107.92 किलोमीटर लंबी सड़कों पर 263.61 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत व्यय की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी की सड़कों को अधिक मजबूत, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्यों को जोनवार आधार पर क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे बड़े और प्रतिष्ठित सड़क निर्माणकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो तथा आधुनिक मशीनरी और नवीन तकनीकों का प्रभावी उपयोग भी किया जाए।
रेखा गुप्ता ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए कोल्ड मिलिंग यानी पुरानी और खराब हो चुकी सड़क की ऊपरी परत को मशीन से हटाना, डेंस बिटुमिनस मैकाडम यानी सड़क को मजबूत बनाने के लिए डामर और पत्थर की मोटी आधार परत बिछाना और बिटुमिनस कंक्रीट यानी सड़क की सबसे ऊपरी चिकनी और टिकाऊ परत बिछाना का कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त टैक कोट यानी पुरानी और नई सड़क परत के बीच मजबूत चिपकाव के लिए विशेष कोटिंग करना, रोड मार्किंग यानी सड़क पर लेन, जेब्रा क्रॉसिंग और अन्य यातायात संकेतों की मार्किंग करना, रोड फर्नीचर यानी साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर, डिवाइडर मार्कर, सुरक्षा बैरियर आदि लगाना और कर्ब चैनल यानी सड़क किनारे कंक्रीट के कर्ब और बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था बनाना सहित सभी आवश्यक कार्य किए जाएंगे, जिससे सड़कों की संरचनात्मक मजबूती, गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन में उल्लेखनीय सुधार होगा।
रेखा गुप्ता ने कहा कि पारंपरिक सड़क-वार टेंडर प्रणाली के स्थान पर पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली अपनाई जा रही है, जिससे कार्यों के निष्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे आधुनिक मशीनरी और तकनीक का बेहतर उपयोग हो सकेगा, कार्यों की गुणवत्ता पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी और निर्माण के बाद रखरखाव की जवाबदेही भी तय होगी। दिल्ली सरकार केवल निर्माण कार्यों पर ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान दे रही है। सभी परियोजनाओं में पांच वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि निर्धारित की गई है। विशेष बात यह है कि लाइबिलिटी अवधि के दौरान अगर किसी सड़क में गड्ढा होता है तो उसे 48 घंटे में भरा जाएगा। कार्यों की प्रगति जीएसडीएल डीपीएमजी पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। कार्य शुरू होने से पहले, कार्य के दौरान और कार्य पूर्ण होने के बाद जियो-टैग्ड फोटोग्राफ भी अपलोड किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सीएसआईआर सीआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर एसपीए द्वारा स्वतंत्र ऑडिट के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य को अक्टूबर माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेखा गुप्ता के अनुसार यह परियोजना केवल सड़कों के सुदृढ़ीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के व्यापक उद्देश्यों को भी ध्यान में रखकर तैयार की गई है। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान धूल नियंत्रण और वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित सभी आवश्यक मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए टेंडरों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग सीएक्यूएम के निर्धारित फ्रेमवर्क के अनुरूप तैयार किया गया है। बेहतर सड़कें नागरिकों को अधिक सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के साथ-साथ धूल प्रदूषण को कम करने और राजधानी के पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।




