Kashi Railway Station: स्टेशन विस्तार परियोजना के बीच गंज शहीदा मस्जिद को खाली करने का नोटिस, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने जताई आपत्ति

Kashi Railway Station: स्टेशन विस्तार परियोजना के बीच गंज शहीदा मस्जिद को खाली करने का नोटिस, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने जताई आपत्ति

वाराणसी। काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण और विस्तार परियोजना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे स्टेशन आधुनिकीकरण कार्य के तहत रेलवे प्रशासन ने गंज शहीदा मस्जिद परिसर पर नोटिस चस्पा कर 20 जून तक स्थल खाली करने का निर्देश दिया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी दिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और मामले ने नया तूल पकड़ लिया है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार रात रेलवे प्रशासन की ओर से मस्जिद परिसर पर नोटिस लगाया गया। मंगलवार सुबह नमाज अदा करने पहुंचे लोगों की नजर जब इस नोटिस पर पड़ी तो स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद वाराणसी की मस्जिदों के प्रबंधन से जुड़ी संस्था अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने रेलवे के दावे और कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई है।

संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि नोटिस में कई प्रकार की खामियां हैं और इसे भ्रामक तरीके से जारी किया गया है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से नोटिस के जवाब में आपत्तिपत्र भी चस्पा किया गया, जिसमें कहा गया कि इस प्रकार की कार्रवाई से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को अदालत में चुनौती देगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखेगी।

गौरतलब है कि काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और विकास कार्य के तहत इससे पहले भी एक मंदिर, एक मस्जिद और दो मजारों को हटाया जा चुका है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है और स्टेशन विकास परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, सभी कदम कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के तहत उठाए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के सचिव मोहम्मद यासीन ने नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मस्जिद पर लगाए गए नोटिस में किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही उसमें जारी करने की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित की गई है। ऐसे में नोटिस की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

मोहम्मद यासीन ने यह भी दावा किया कि नोटिस में जिस मुकदमे के खारिज होने का उल्लेख किया गया है, वह मस्जिद परिसर से संबंधित नहीं बल्कि मस्जिद के पूर्व दिशा में स्थित भूमि से जुड़ा मामला था। उनका कहना है कि उस मुकदमे के दौरान रेलवे प्रशासन ने अपने शपथपत्र में मस्जिद के अस्तित्व और मुस्लिम समुदाय के अधिकार को स्वीकार किया था। ऐसे में वर्तमान कार्रवाई को लेकर कई कानूनी और तथ्यात्मक सवाल सामने आ रहे हैं।

काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास परियोजना वाराणसी के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्टेशन की क्षमता बढ़ाना है। हालांकि, गंज शहीदा मस्जिद को लेकर उत्पन्न विवाद ने इस परियोजना को नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

फिलहाल रेलवे प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन समिति अपने-अपने दावों पर कायम हैं। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। स्थानीय लोगों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि विवाद का समाधान किस प्रकार और किन कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है।

 

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