Lactoferrin Research: बैक्टीरिया संक्रमण से लड़ने में कारगर साबित हो सकता है प्रकृति का ‘सुपर प्रोटीन’, AIIMS के शोध में बड़ा खुलासा

Lactoferrin Research: बैक्टीरिया संक्रमण से लड़ने में कारगर साबित हो सकता है प्रकृति का ‘सुपर प्रोटीन’, AIIMS के शोध में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। संक्रमण से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्षमता को समझने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। हालिया शोध में सामने आया है कि लैक्टोफेरिन नामक प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल प्रोटीन पाचन प्रक्रिया के दौरान भी अपनी प्रभावशीलता बनाए रखता है और लंबे समय तक शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में एंटीबायोटिक प्रतिरोध यानी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की चुनौती से निपटने के लिए नई पीढ़ी की प्राकृतिक दवाओं के विकास का आधार बन सकती है।
लैक्टोफेरिन एक शक्तिशाली प्राकृतिक प्रोटीन है, जो मां के दूध सहित शरीर के कई तरल पदार्थों में पाया जाता है। यह लंबे समय से अपनी रोगाणुरोधी और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाली विशेषताओं के लिए जाना जाता रहा है। हालांकि अब एम्स दिल्ली के शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि पेट में पाचन एंजाइमों की प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी यह प्रोटीन अपनी एंटीबैक्टीरियल क्षमता नहीं खोता।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि पाचन के बाद लैक्टोफेरिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, जिसे ‘सी-लोब’ कहा जाता है, कम से कम तीन दिनों तक सक्रिय बना रहता है। यह हिस्सा बैक्टीरिया को उनके विकास के लिए आवश्यक आयरन उपलब्ध नहीं होने देता, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती है और संक्रमण फैलने की संभावना कम हो जाती है। इस प्रकार लैक्टोफेरिन शरीर को लंबे समय तक प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

एम्स दिल्ली के बायोफिजिक्स विभाग के प्रोफेसर तेजपाल सिंह, प्रोफेसर सुजाता शर्मा और उनकी शोध टीम ने इस अध्ययन में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी का उपयोग किया। शोध के दौरान यह भी पाया गया कि विभिन्न पाचन एंजाइम लैक्टोफेरिन को हमेशा एक निश्चित स्थान पर ही विभाजित करते हैं, जिससे इसका सबसे प्रभावी और सक्रिय हिस्सा सुरक्षित बना रहता है। यही कारण है कि इसकी एंटीबैक्टीरियल क्षमता लंबे समय तक बरकरार रहती है।
यह महत्वपूर्ण अध्ययन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल *‘प्रोटीन: स्ट्रक्चर, फंक्शन एंड बायोइन्फॉर्मेटिक्स’* में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिक समुदाय इस शोध को संक्रमण नियंत्रण और प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से स्वास्थ्य क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले, संक्रमण से बचाव के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित दवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इसके अलावा एंटीबायोटिक दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को कम करने में भी मदद मिल सकती है, जो वर्तमान समय में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
अस्पतालों में होने वाले संक्रमणों की रोकथाम के लिए भी लैक्टोफेरिन आधारित नए उपचार विकसित किए जा सकते हैं। इसके साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाने वाले न्यूट्रास्यूटिकल्स, हेल्थ सप्लीमेंट्स और विशेष पोषण उत्पादों को अधिक प्रभावी बनाने में इस शोध का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि शिशुओं, कैंसर मरीजों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए विशेष पोषण उत्पाद तैयार करने में भी यह शोध उपयोगी साबित होगा। ऐसे उत्पाद न केवल संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं बल्कि शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बना सकते हैं।
एम्स दिल्ली का यह शोध दर्शाता है कि प्रकृति में मौजूद कई जैविक तत्व भविष्य की चिकित्सा प्रणाली को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। लैक्टोफेरिन पर हुई यह खोज संक्रमण नियंत्रण, पोषण विज्ञान और प्रतिरक्षा चिकित्सा के क्षेत्र में नए अवसरों का द्वार खोल सकती है।





