Uttar Pradesh : हापुड़ में Google Map पर भरोसा पड़ा भारी, नाले में फंसी कार, कड़ी मशक्कत के बाद परिवार को निकाला सुरक्षित

Hapur : बदलते दौर में तकनीक जहां हमारे काम आसान कर रही है, वहीं कभी-कभी यह बड़ी मुसीबत का सबब भी बन जाती है। ऐसा ही एक मामला रविवार की रात हापुड़ में सामने आया, जहां गूगल मैप पर भरोसा करना एक परिवार को बेहद भारी पड़ गया। रास्ता भटककर परिवार की कार एक गहरे नाले में जा फंसी, जिसके बाद कार के सभी दरवाजे ऑटोमैटिक लॉक हो गए। कार में मौजूद बच्चों और महिलाओं सहित पांच लोगों की जान हलक में अटक गई। सूचना मिलने पर पहुंची डायल 112 और दमकल विभाग की टीम ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
दरअसल, गौतमबुद्धनगर के दादरी क्षेत्र स्थित सद्दीपुरा निवासी साहिल अपने परिवार के साथ पूर्वी जिले के किठौर में एक शादी समारोह में जा रहे थे। जब वे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास थे, तो वहां दिल्ली रोड फ्लाईओवर पर निर्माण कार्य बंद था। आगे का रास्ता न जानने के कारण साहिल ने किठौर पहुंचने के लिए गूगल मैप्स की मदद ली। गूगल मैप ने उन्हें हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की आनंद विहार योजना की तरफ से रास्ता दिखाया। मैप का अनुसरण करते हुए वे श्यामनगर फाटक के पास प्रीत विहार इलाके में पहुंच गए। वहां सड़क पर काफी पानी भरा हुआ था। अंधेरा होने के कारण साहिल को लगा कि सड़क पर मामूली जलभराव है और कार आसानी से निकल जाएगी। लेकिन जैसे ही उन्होंने कार आगे बढ़ाई, वह सड़क किनारे बने एक गहरे नाले में उतर गई और फंस गई।
नाले के पानी और कीचड़ में फंसते ही कार का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल हो गया और उसके चारों दरवाजे लॉक हो गए। कार के अंदर साहिल, गुड्डी, मोहम्मद ईशान और दो मासूम बच्चे कैद हो गए। खुद को फंसता देख और कार में पानी घुसने के डर से परिवार में चीख-पुकार मच गई। साहिल ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पीआरवी ने जब स्थिति की गंभीरता को देखा, तो तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया। दमकल केंद्र प्रभारी की अगुवाई में टीम तुरंत रेस्क्यू उपकरणों के साथ पहुंची। दमकल कर्मियों ने लगभग दो घंटे की भारी मशक्कत के बाद कार के शीशे तोड़कर सभी पांचों सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला। सुरक्षित बाहर आने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस और दमकल टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। इस हादसे के बाद सहमा हुआ परिवार किठौर जाने के बजाय वापस दादरी लौट गया।
