FD Interes: एफडी रिन्यू नहीं होने का बहाना नहीं चलेगा, उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ब्याज सहित भुगतान का दिया आदेश

FD Interes: एफडी रिन्यू नहीं होने का बहाना नहीं चलेगा, उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ब्याज सहित भुगतान का दिया आदेश

नोएडा में एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) का नवीनीकरण नहीं होने के आधार पर बैंक ग्राहकों को ब्याज देने से इनकार नहीं कर सकता। आयोग ने एक मामले की सुनवाई के बाद कैनरा बैंक को ग्राहक को बकाया राशि ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है। यह मामला नोएडा के सेक्टर-51 निवासी महेंद्र कुमार शुक्ला से जुड़ा है, जिनका कैनरा बैंक की सेक्टर-1 शाखा में बचत खाता है। उनके द्वारा बैंक में दो सावधि जमा (एफडी) कराई गई थीं, जिन पर 9.25 प्रतिशत की दर से ब्याज निर्धारित था। पहली एफडी 19 अक्टूबर 2014 को और दूसरी एफडी 30 अगस्त 2014 को परिपक्व हो गई थी। महेंद्र कुमार शुक्ला का कहना था कि एफडी की अवधि पूरी होने के बाद बैंक की ओर से उन्हें बताया गया था कि दोनों एफडी का नवीनीकरण कर दिया गया है। हालांकि, जब उन्होंने 1 मार्च 2024 को अपने खाते की जांच की, तो पाया कि वर्ष 2017 से 2024 तक की अवधि का ब्याज उनके खाते में जमा नहीं किया गया है। जब उन्होंने बैंक अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि वर्ष 2017 में एफडी का नवीनीकरण नहीं हुआ था, इसलिए उसके बाद की अवधि का ब्याज देय नहीं माना गया। बैंक के इस जवाब से असंतुष्ट होकर ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि मई 2017 से 1 मार्च 2024 तक की अवधि के लिए एफडी पर 9.25 प्रतिशत की दर से ब्याज बनता था, जिसका भुगतान ग्राहक को नहीं किया गया। आयोग ने इसे बैंक की सेवा में स्पष्ट कमी माना। आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बैंक ग्राहक की वैध राशि रोक नहीं सकता। आयोग ने कैनरा बैंक को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को 2,62,078 रुपये की बकाया राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर अदा करे। इसके अतिरिक्त आयोग ने बैंक को एक हजार रुपये वाद व्यय तथा एक हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के मुआवजे के रूप में भी भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश देता है।

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