Yamuna City: यमुना सिटी में सूखे कूड़े के निस्तारण और रीसाइक्लिंग की तैयारी, बोर्ड बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव

Yamuna City: यमुना सिटी में सूखे कूड़े के निस्तारण और रीसाइक्लिंग की तैयारी, बोर्ड बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव
नोएडा। तेजी से विकसित हो रही यमुना सिटी को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है। शहर के सेक्टरों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले सूखे कचरे के निस्तारण, रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग के लिए व्यापक नीति तैयार की जा रही है। इस संबंध में तैयार प्रस्ताव को 8 जून को होने वाली यीडा की बोर्ड बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। यीडा अधिकारियों के अनुसार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जून से उड़ान सेवाएं शुरू होने की संभावना है। एयरपोर्ट के संचालन के साथ ही यमुना सिटी में आबादी और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कचरा प्रबंधन की दीर्घकालिक योजना तैयार कर रहा है। मास्टर प्लान-2041 के अनुसार अगले 15 वर्षों में यमुना सिटी की आबादी लगभग 37 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार के कारण प्रतिदिन लगभग 2300 टन कचरा उत्पन्न होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में कचरे के वैज्ञानिक संग्रह, छंटाई, निस्तारण और पुनर्चक्रण के लिए मजबूत आधारभूत संरचना विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक यमुना सिटी के सेक्टर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तुलना में आकार में काफी बड़े हैं। इसलिए शहर के विभिन्न हिस्सों में कचरा प्रबंधन की सुविधाओं का विकास किया जाएगा। प्रस्तावित डंपिंग साइट को इस प्रकार विकसित करने की योजना है कि वह अगले 50 वर्षों तक कचरे के प्रबंधन की क्षमता रख सके। प्राधिकरण के अनुसार डंपिंग साइट के लिए भूमि का चयन शहर के दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्व क्षेत्र में किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह स्थल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 20 किलोमीटर के दायरे से बाहर हो, ताकि विमान संचालन और पर्यावरणीय मानकों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। कचरा प्रबंधन की समग्र नीति तैयार करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक विशेषज्ञ परामर्शदाता कंपनी का चयन भी किया जाएगा। यह कंपनी शहर की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। यमुना सिटी के औद्योगिक विकास को देखते हुए प्राधिकरण विशेष रूप से औद्योगिक कचरे के प्रबंधन पर भी ध्यान दे रहा है। औद्योगिक सेक्टर-24, 28, 29, 31 और 33 में अब तक तीन हजार से अधिक भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। वर्तमान में 30 से अधिक उद्योगों में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि लगभग 400 औद्योगिक इकाइयों का निर्माण कार्य जारी है। प्राधिकरण ने वर्ष के अंत तक 180 उद्योगों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया है। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अलावा शहर में 1500 से अधिक आवासीय इकाइयों का निर्माण भी हो चुका है। घरों से निकलने वाले घरेलू कचरे के संग्रहण और प्रबंधन के लिए भी अलग योजना तैयार की जा रही है, जिससे शहर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक कचरे के लिए अलग समर्पित प्रसंस्करण संयंत्रों की आवश्यकता होगी। इसी दिशा में सेक्टर-28 में विकसित किए जा रहे 350 एकड़ के मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए भी विशेष कचरा निस्तारण संयंत्र स्थापित करने की योजना है। यहां उत्पन्न होने वाले बायोमेडिकल वेस्ट, रेडियोधर्मी अवशेष, गामा रेडिएशन से संबंधित सामग्री और अन्य तकनीकी अपशिष्टों के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी। यीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) मनीष मीना ने बताया कि यमुना सिटी को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से व्यापक कूड़ा प्रबंधन नीति तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि कचरे के निस्तारण और प्रबंधन का विस्तृत खाका तैयार करने के लिए परामर्शदाता का चयन किया जाएगा तथा इस संबंध में प्रस्ताव 8 जून की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।




