हिमाचल प्रदेशराज्य

Himcare Scheme: हिमकेयर के बकाया भुगतान के लिए 100 करोड़ जारी, स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधारों का ऐलान

Himcare Scheme: हिमकेयर के बकाया भुगतान के लिए 100 करोड़ जारी, स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधारों का ऐलान

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमकेयर योजना के तहत लंबित भुगतान के निपटारे के लिए 100 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को उनके घर के नजदीक बेहतर और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं और भविष्य में भी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज चमियाणा, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। इन प्रयोगशालाओं की मदद से खून के एक ही नमूने से कई प्रकार की जांचें की जा सकेंगी, जिससे मरीजों को तेजी से और अधिक सटीक रिपोर्ट मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि इन आधुनिक प्रयोगशालाओं के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा टांडा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों में पीईटी स्कैन मशीनें स्थापित करने के लिए भी निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। इससे कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के निदान और उपचार में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उनका उद्देश्य प्रदेश के अस्पतालों में विश्वस्तरीय तकनीक उपलब्ध कराकर मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा प्रदान करना है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांचों के लिए प्रतीक्षा अवधि पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए और समय पर जांच होने से उपचार भी शीघ्र शुरू किया जा सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में बड़ी सर्जरी के लिए भी शून्य प्रतीक्षा अवधि सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है। इससे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और क्षमता दोनों में सुधार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और ब्रांडेड दवाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि दवाओं की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम को यह जिम्मेदारी सौंपने पर विचार किया जा रहा है।

बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, सचिव पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सुशील कुमार सिंगला, विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. अश्वनी शर्मा, राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button