Padma Shri Award: पद्मश्री सम्मान मिलने पर पुरातत्वविद् डॉ. बुद्धरश्मि मणि ने कहा- विरासत संरक्षण ही राष्ट्र निर्माण का आधार

Padma Shri Award: पद्मश्री सम्मान मिलने पर पुरातत्वविद् डॉ. बुद्धरश्मि मणि ने कहा- विरासत संरक्षण ही राष्ट्र निर्माण का आधार
नोएडा: Buddha Rashmi Mani को राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा पद्मश्री सम्मान दिए जाने के बाद नोएडा के शैक्षणिक और पुरातात्विक जगत में खुशी की लहर है। सेक्टर-62 स्थित Indian Heritage Institute के पूर्व कुलपति और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. मणि ने कहा कि “विरासत बचाना ही राष्ट्र निर्माण” है।
डॉ. बुद्धरश्मि मणि को यह सम्मान केवल अयोध्या उत्खनन में उनकी भूमिका के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और प्रमाणित करने में दशकों लंबे योगदान के लिए दिया गया है। पुरातत्व जगत में उन्हें ऐसे विशेषज्ञ के रूप में देखा जाता है जिन्होंने इतिहास को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन के भीतर छिपे तथ्यों को सामने लाकर नई पीढ़ी को भारतीय सभ्यता से जोड़ने का कार्य किया।
साल 2003 में राम जन्मभूमि मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर हुए उत्खनन के दौरान डॉ. मणि के नेतृत्व में एएसआई टीम ने महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य जुटाए थे। उत्खनन में उत्तर भारतीय नागर शैली के अवशेष, स्तंभों के आधार और अभिलेख मिले थे, जिन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि डॉ. मणि का योगदान केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दिल्ली के लाल कोट और सलीमगढ़, हरियाणा के कुणाल, उत्तर प्रदेश के संकिसा और सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर के अंबारन समेत 20 से अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर उत्खनन कार्य का नेतृत्व किया। उनके शोध और कार्यों को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है।
Archaeological Survey of India में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले डॉ. मणि को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें वर्ष 2017 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, 2023 में शारदा शताही सम्मान और भारतीय बौद्ध अध्ययन समाज द्वारा मंजू श्री सम्मान प्रदान किया गया था।

