AIIMS Delhi: एम्स की बड़ी रिसर्च! सस्ती दवा ‘डायजोक्सिन’ से हार्ट फेलियर और मौत का खतरा हुआ कम

AIIMS Delhi: एम्स की बड़ी रिसर्च! सस्ती दवा ‘डायजोक्सिन’ से हार्ट फेलियर और मौत का खतरा हुआ कम
रूमेटिक हार्ट डिजीज यानी आरएचडी से पीड़ित मरीजों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। एम्स दिल्ली की अगुवाई में किए गए एक बड़े क्लीनिकल ट्रायल में यह पाया गया है कि दशकों पुरानी और बेहद सस्ती दवा ‘डायजोक्सिन’ हार्ट फेलियर बिगड़ने और मौत के खतरे को कम करने में काफी असरदार साबित हो सकती है। इस रिसर्च को देशभर के 12 बड़े अस्पतालों के सहयोग से पूरा किया गया और इसके नतीजे अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिष्ठित जर्नल जामा में प्रकाशित किए गए हैं।
अध्ययन के मुताबिक डायजोक्सिन लेने वाले मरीजों में हार्ट फेलियर बिगड़ने या मृत्यु का खतरा लगभग 18 प्रतिशत तक कम पाया गया। इस क्लीनिकल ट्रायल में कुल 1,769 मरीजों को शामिल किया गया था। इनमें से आधे मरीजों को डायजोक्सिन दी गई जबकि बाकी मरीजों को प्लेसीबो यानी नकली दवा दी गई। मरीजों की औसतन 2.1 वर्षों तक निगरानी की गई। इस अध्ययन में एम्स दिल्ली के अलावा सफदरजंग अस्पताल, गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल, जेआईपीएमईआर समेत देश के कई बड़े चिकित्सा संस्थानों ने हिस्सा लिया। इस रिसर्च को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर की वित्तीय सहायता से पूरा किया गया।
रूमेटिक हार्ट डिजीज एक गंभीर हृदय रोग है जो आमतौर पर बचपन में गले के संक्रमण के बाद विकसित होता है। यह बीमारी हृदय के वाल्वों को नुकसान पहुंचाती है और समय के साथ सांस फूलना, तेज धड़कन, हार्ट फेलियर और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकती है। दुनियाभर में करोड़ों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और भारत में भी इसके मरीजों की संख्या काफी अधिक है।
अध्ययन में सामने आया कि डायजोक्सिन लेने वाले 31.4 प्रतिशत मरीजों में हार्ट फेलियर बिगड़ने या मौत की स्थिति बनी, जबकि प्लेसीबो लेने वाले मरीजों में यह आंकड़ा 35.5 प्रतिशत रहा। यानी डायजोक्सिन से कुल जोखिम में 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा हार्ट फेलियर बिगड़ने का खतरा भी 18 प्रतिशत तक कम पाया गया। हालांकि कुल मृत्यु दर में कोई बड़ा अंतर नहीं देखा गया। अच्छी बात यह रही कि डायजोक्सिन की विषाक्तता यानी टॉक्सिसिटी केवल 1.1 प्रतिशत मरीजों में ही देखी गई।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों को पहले से एट्रियल फिब्रिलेशन यानी अनियमित धड़कन की समस्या थी या जो पहले से डायजोक्सिन ले रहे थे, उनमें इसके फायदे और ज्यादा स्पष्ट दिखाई दिए। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. गणेशन कार्तिकेयन के अनुसार डायजोक्सिन एक पुरानी, सस्ती और आसानी से उपलब्ध दवा है, जो रूमेटिक हार्ट डिजीज से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकती है।





