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AIIMS Delhi: एम्स दिल्ली में मिर्गी मरीजों के लिए शुरू हुई हाईटेक जांच सुविधा, इलाज होगा ज्यादा सुरक्षित और सटीक

AIIMS Delhi:एम्स दिल्ली में मिर्गी मरीजों के लिए शुरू हुई हाईटेक जांच सुविधा, इलाज होगा ज्यादा सुरक्षित और सटीक

All India Institute of Medical Sciences ने मिर्गी के मरीजों के इलाज को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एम्स दिल्ली के न्यूरो साइंसेज सेंटर ने अब अत्याधुनिक थैरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग (टीडीएम) सुविधा शुरू कर दी है। इस नई तकनीक की मदद से मरीजों के खून में मिर्गी की दवाओं की सही मात्रा का पता लगाया जा सकेगा, जिससे इलाज और अधिक सटीक हो पाएगा।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार टीडीएम जांच के जरिए एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं Levetiracetam और Lamotrigine की सटीक मात्रा मापी जाएगी। इससे डॉक्टर मरीज की शारीरिक स्थिति, दवा के असर और शरीर की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए सही डोज तय कर सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार दवा की मात्रा कम या ज्यादा होने से मरीज को पूरा लाभ नहीं मिल पाता या साइड इफेक्ट्स बढ़ जाते हैं। नई सुविधा से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

एम्स के न्यूरो साइंसेज सेंटर प्रमुख प्रो. शैलेश बी गायकवाड़ ने बताया कि अब तक मरीजों को ऐसी जांच के लिए महंगी निजी लैब्स का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन अब यह सुविधा एम्स में ही उपलब्ध होने से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। यह सेवा ओपीडी और भर्ती दोनों तरह के मरीजों के लिए शुरू की गई है।

न्यूरोबायोकैमिस्ट्री लैब प्रभारी प्रो. अशोक शर्मा के अनुसार जांच के लिए केवल 1 से 3 एमएल खून का सैंपल लिया जाएगा। जांच रिपोर्ट डॉक्टरों को ई-हॉस्पिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि मरीज अपनी रिपोर्ट ओआरएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे मरीजों को बार-बार अस्पताल आने की जरूरत भी कम होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि एम्स की यह पहल देश में मिर्गी और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में प्रिसिजन मेडिसिन को नई मजबूती देगी। नई तकनीक की मदद से इलाज अधिक व्यक्तिगत, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकेगा, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।

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