Greater Noida Green Area: गोद देने के बाद भी हरित क्षेत्र और गोलचक्कर बदहाल

Greater Noida Green Area: गोद देने के बाद भी हरित क्षेत्र और गोलचक्कर बदहाल
ग्रेटर नोएडा में गोलचक्करों, हरित क्षेत्रों और सेंट्रल वर्ज को सुंदर बनाने के लिए शुरू की गई ‘गोद लेने’ की योजना जमीनी स्तर पर फेल होती नजर आ रही है। अधिकांश स्थानों पर रखरखाव के अभाव और भीषण गर्मी में पानी न मिलने से पेड़-पौधे सूख रहे हैं और हरियाली खत्म होती जा रही है।
ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट को जोड़ने वाली 130 मीटर चौड़ी सड़क पर मिग्सन अल्टिमो सोसाइटी के पास स्थित गोलचक्कर सबसे ज्यादा बदहाल स्थिति में है। यहां गोद लेने वाली संस्था ने प्रचार के लिए बोर्ड तो लगाए हैं, लेकिन महीनों से टूटी दीवार की मरम्मत तक नहीं कराई गई। पानी न मिलने से घास पूरी तरह सूख चुकी है और गोलचक्कर की सुंदरता खत्म हो गई है।
इसी मार्ग पर बिरौंडी-बिरौंडा सेक्टर पाई-1 के यू-टर्न के पास सेंट्रल वर्ज में धूल उड़ती दिख रही है। पौधे सूख चुके हैं और गर्मी के बावजूद कहीं सिंचाई होती नजर नहीं आ रही। प्राधिकरण ने अपने दफ्तर से लेकर मिग्सन अल्टिमो गोलचक्कर तक के हरित क्षेत्र को गोद दिया है, लेकिन स्थिति संतोषजनक नहीं है।
सेक्टर डेल्टा-1 लेबर चौक, सेक्टर बीटा-1 रॉयन गोलचक्कर और सूरजपुर-कासना मार्ग के सेंट्रल वर्ज की हालत भी खराब बनी हुई है। इन स्थानों पर हरियाली लगभग गायब हो चुकी है।
प्राधिकरण ने कंपनियों, शैक्षिक संस्थानों और एनजीओ को गोलचक्कर और हरित क्षेत्र गोद देकर उनके रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बदले में उन्हें वहां विज्ञापन करने और उससे आय अर्जित करने की अनुमति दी गई। ग्रेटर नोएडा में कुल 34 गोलचक्कर हैं, जिनमें से अधिकांश गोद दिए जा चुके हैं।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर संस्थाएं केवल विज्ञापन से कमाई पर ध्यान दे रही हैं, जबकि रखरखाव को नजरअंदाज किया जा रहा है। एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य आलोक सिंह का कहना है कि कुछ संस्थाओं को छोड़कर बाकी ने जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। वहीं, स्थानीय निवासी हरेंद्र भाटी का कहना है कि लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं के अनुबंध रद्द किए जाने चाहिए।
शहर में हरियाली बनाए रखने के लिए शुरू की गई यह योजना फिलहाल अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है, जिसे सुधारने के लिए सख्त निगरानी और कार्रवाई की जरूरत है।





