Alzheimer Research: एमाइलॉइड हटाने से नहीं सुधरता अल्जाइमर, नई स्टडी का बड़ा खुलासा

Alzheimer Research: एमाइलॉइड हटाने से नहीं सुधरता अल्जाइमर, नई स्टडी का बड़ा खुलासा
अल्जाइमर रोग के इलाज को लेकर वर्षों से चली आ रही एक प्रमुख धारणा अब सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में सामने आई एक विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा में यह स्पष्ट किया गया है कि दिमाग से एमाइलॉइड प्लाक हटाने मात्र से मरीजों की स्थिति में वास्तविक और सार्थक सुधार नहीं होता। इस निष्कर्ष ने अल्जाइमर के उपचार को लेकर स्थापित सोच को चुनौती दी है और चिकित्सा जगत को नए दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है।
प्रतिष्ठित कोक्रेन कोलैबोरेशन की सिस्टमैटिक रिव्यू के अनुसार, एंटी-एमाइलॉइड दवाएं दिमाग में एमाइलॉइड का स्तर कम करने में सक्षम हैं, लेकिन इसका मरीजों की याददाश्त, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा के जीवन पर बहुत सीमित प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में पाया गया कि ब्रेन इमेजिंग और अन्य बायोमार्कर में सुधार जरूर दिखाई देता है, लेकिन जब मरीज के वास्तविक जीवन से जुड़े पहलुओं का मूल्यांकन किया गया, तो नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
इहबास के उपाधीक्षक और वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डॉ. ओमप्रकाश ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बायोमार्कर में सुधार को मरीज की वास्तविक रिकवरी मान लेना एक बड़ी भूल है। उनके अनुसार, अल्जाइमर एक जटिल और बहु-कारक बीमारी है, जिसे केवल एक ही कारण या लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्जाइमर रोग केवल एमाइलॉइड प्लाक तक सीमित नहीं है। इसमें टाऊ प्रोटीन की असामान्यता, दिमाग में सूजन यानी न्यूरो-इन्फ्लेमेशन, रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिम, न्यूरॉन्स के बीच कमजोर होता संपर्क और मानसिक-सामाजिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस कारण केवल एक प्रकार के उपचार से बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है।
हालांकि, कुछ नई मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाएं शुरुआती चरण में बीमारी की प्रगति को धीमा करने के संकेत देती हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित पाया गया है। इसके अलावा इन दवाओं की लागत काफी अधिक है और इनके साथ एआरआईए जैसे साइड इफेक्ट्स—जिसमें दिमाग में सूजन या सूक्ष्म रक्तस्राव हो सकता है—भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
इस नई समीक्षा के बाद विशेषज्ञ अब अल्जाइमर के इलाज में व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। इसमें बीमारी के जोखिम की जल्द पहचान, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसे वैस्कुलर फैक्टर्स को नियंत्रित करना, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना, संज्ञानात्मक प्रशिक्षण देना और मरीज की देखभाल करने वालों को उचित समर्थन देना शामिल है।
डॉक्टरों का मानना है कि अब समय आ गया है कि अल्जाइमर के इलाज को केवल एक सिद्धांत तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मरीज-केंद्रित और समन्वित रणनीति अपनाई जाए, जिससे वास्तविक सुधार संभव हो सके और मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सके।
एमाइलॉइड प्लाक दरअसल दिमाग में तंत्रिका कोशिकाओं के बीच जमा होने वाले विकृत प्रोटीन के गुच्छे होते हैं। ये धीरे-धीरे उन हिस्सों में इकट्ठा होते हैं जो याददाश्त और सोचने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। इनके जमा होने से कोशिकाओं के बीच संचार बाधित होता है, इसलिए इन्हें अल्जाइमर रोग का एक प्रमुख कारण माना जाता है, हालांकि अब यह स्पष्ट हो रहा है कि बीमारी की जड़ें इससे कहीं अधिक जटिल हैं।
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