Consumer Court Noida: होटल बुकिंग रद्द होने पर वैकल्पिक व्यवस्था स्वीकार करना सेवा में कमी नहीं

Consumer Court Noida: होटल बुकिंग रद्द होने पर वैकल्पिक व्यवस्था स्वीकार करना सेवा में कमी नहीं
नोएडा में जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि होटल बुकिंग रद्द होने के बाद कंपनी द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है और ग्राहक उसे स्वीकार कर लेता है, तो इसे सेवा में कमी नहीं माना जाएगा। इसी आधार पर आयोग ने धन वापसी की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया।
यह मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी संकेत रस्तोगी से जुड़ा है, जिन्होंने MakeMyTrip के माध्यम से दुबई के Hyatt Regency Dubai Creek Heights में 20 फरवरी से 3 मार्च 2024 के बीच चार रातों के लिए 1,04,787 रुपये में बुकिंग कराई थी। ई-मेल के जरिए इसकी पुष्टि भी हुई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 28 फरवरी को जब वह अपनी पत्नी के साथ होटल पहुंचे तो प्रबंधन ने बुकिंग से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क किया, जहां से उन्हें बताया गया कि किसी कारणवश उनकी बुकिंग रद्द हो गई है और इसकी पूर्व सूचना उन्हें नहीं दी गई थी।
इसके बाद कंपनी ने उन्हें एक वैकल्पिक होटल उपलब्ध कराया, जिसे उन्होंने परिस्थितियों के चलते स्वीकार कर लिया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि नए होटल में उन्हें कई असुविधाओं का सामना करना पड़ा। कंपनी ने मुआवजे के तौर पर 5,000 रुपये का वाउचर देने की पेशकश की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया और उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने दलील दी कि होटल द्वारा चेक-इन से इंकार करने के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही आपात स्थिति में नई बुकिंग कराने के कारण कंपनी को 24,681 रुपये का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा।
आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने वैकल्पिक व्यवस्था स्वीकार कर ली थी, इसलिए इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित होटल को इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया, जबकि चेक-इन से इंकार उसी की ओर से किया गया था।
यह फैसला उपभोक्ता मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि आपात परिस्थितियों में दी गई वैकल्पिक सेवाओं को स्वीकार करने के बाद कंपनियों पर सेवा में कमी का आरोप साबित करना आसान नहीं होता।




