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Safe Motherhood AIIMS Advisory: सुरक्षित मातृत्व के लिए कम से कम 4 प्रसव पूर्व जांच जरूरी, 2030 तक MMR 70 से नीचे लाने का लक्ष्य

Safe Motherhood AIIMS Advisory: सुरक्षित मातृत्व के लिए कम से कम 4 प्रसव पूर्व जांच जरूरी, 2030 तक MMR 70 से नीचे लाने का लक्ष्य

नई दिल्ली में All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) ने सुरक्षित मातृत्व को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव से पहले कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच (ANC checkups) बेहद जरूरी हैं, ताकि गर्भावस्था के दौरान किसी भी जोखिम की समय रहते पहचान और इलाज किया जा सके।

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर यह जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें सुरक्षित गर्भावस्था, समय पर जांच और संस्थागत प्रसव पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 93 से घटकर 88 प्रति लाख जीवित जन्म तक पहुंच गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

AIIMS की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर Garima Kachhawa ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा हो। इसके साथ ही आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लेना और जरूरी टीकाकरण जैसे टेटनस वैक्सीन समय पर लगवाना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने चेतावनी दी कि तेज सिरदर्द, शरीर में सूजन, रक्तस्राव या भ्रूण की हलचल कम महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सुरक्षित प्रसव के लिए घर की बजाय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

सरकार की योजनाओं जैसे Janani Suraksha Yojana और Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त जांच, दवाइयां और सुरक्षित प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि गर्भावस्था से पहले एनीमिया (खून की कमी) की स्थिति को रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है जिसे पूरी तरह रोका जा सकता है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य तय किया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 1990 के बाद से एमएमआर में लगभग 86% की कमी दर्ज की है, जो वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, बेहतर पोषण, जागरूकता और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर भारत इस लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकता है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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