Noida Surgery Miracle: 10 घंटे की सर्जरी से उज्बेकिस्तान की बच्ची को मिला नया जीवन

Noida Surgery Miracle: 10 घंटे की सर्जरी से उज्बेकिस्तान की बच्ची को मिला नया जीवन
नोएडा के मैक्स अस्पताल में डॉक्टरों ने एक जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर उज्बेकिस्तान की 6 वर्षीय बच्ची को नया जीवन दिया है। बच्ची एक गंभीर जन्मजात बीमारी पैरामीडियन क्रेनियोफेशियल क्लेफ्ट विद हाइपरटेलोरिज़्म से पीड़ित थी, जिसके कारण उसके चेहरे की हड्डियों का विकास असामान्य था और आंखों के बीच की दूरी सामान्य से काफी अधिक थी।
इस चुनौतीपूर्ण केस में सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. आशीष राय और न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. प्रांकुल सिंघल के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने करीब 10 घंटे तक चली जटिल क्रेनियोफेशियल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची की आंखों के बीच की दूरी लगभग 45 मिमी थी, जो सामान्य 25–30 मिमी से काफी ज्यादा थी। इसके साथ ही नाक का आकार भी असामान्य था और उसका सिरा विभाजित था। इस सर्जरी का उद्देश्य केवल चेहरे की बनावट को सुधारना ही नहीं, बल्कि दृष्टि को सुरक्षित रखना और मस्तिष्क व ऑप्टिक नर्व्स जैसे संवेदनशील हिस्सों की रक्षा करना भी था।
सर्जरी के दौरान आंखों के आसपास की हड्डियों को अत्यंत सावधानी से काटकर दोबारा व्यवस्थित किया गया। साथ ही बोन ग्राफ्ट की मदद से नाक की संरचना को पुनर्निर्मित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में डॉक्टरों को दिमाग, आंखों की नसों और प्रमुख रक्त वाहिकाओं जैसे बेहद संवेदनशील हिस्सों के बीच काम करना पड़ा, जहां मामूली गलती भी गंभीर परिणाम दे सकती थी।
करीब 10 घंटे की सर्जरी के बाद बच्ची के चेहरे की संरचना को नया आकार दिया गया और आंखों के बीच की दूरी 45 मिमी से घटाकर 28 मिमी कर दी गई, जो अब सामान्य सीमा में है। इससे न केवल उसका चेहरा अधिक प्राकृतिक दिखने लगा है, बल्कि उसकी दृष्टि भी सुरक्षित रखी जा सकी है।
सर्जरी के बाद का समय भी चुनौतीपूर्ण रहा। रिकवरी के दौरान बच्ची को सेकेंडरी निमोनिया हो गया, लेकिन पीडियाट्रिक और न्यूरो-एनेस्थीसिया टीम ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया। कई दिनों तक पीआईसीयू में निगरानी के बाद पांचवें दिन बच्ची को सुरक्षित रूप से एक्सट्यूबेट किया गया।
यह सफल सर्जरी न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, बल्कि यह दिखाती है कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम किस तरह जटिल से जटिल मामलों में भी नई उम्मीद जगा सकती है।





