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Noida NGT Action: नोएडा प्रतीक स्टाइलोम परियोजना पर NGT का सख्त रुख, भूजल दोहन मामले में 1 करोड़ जुर्माना वसूलने का आदेश

Noida NGT Action: नोएडा प्रतीक स्टाइलोम परियोजना पर NGT का सख्त रुख, भूजल दोहन मामले में 1 करोड़ जुर्माना वसूलने का आदेश

नोएडा। सेक्टर-45 स्थित प्रतीक बिल्डटेक की स्टाइलोम परियोजना में निर्माण कार्य के दौरान भूजल के अवैध दोहन के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। National Green Tribunal (एनजीटी) ने करीब आठ वर्ष पहले लगाए गए एक करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली ब्याज सहित करने का आदेश जारी किया है। इसके लिए एनजीटी ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वह यह राशि वसूलकर Central Pollution Control Board (सीपीसीबी) के खाते में जमा कराएं।

जानकारी के अनुसार, सेक्टर-45 में स्थित प्रतीक बिल्डटेक की स्टाइलोम परियोजना का निर्माण वर्ष 2011 में करीब 14.50 लाख वर्ग फुट सुपर एरिया में शुरू किया गया था। ग्रीन बिल्डिंग नियमों के तहत निर्माण कार्य में भूजल के उपयोग पर रोक होती है। इसके स्थान पर निर्माण कंपनियों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के शुद्ध पानी या प्राधिकरण के एसटीपी से खरीदे गए पानी का उपयोग करना होता है।

हालांकि इस परियोजना में निर्माण के दौरान भूजल का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत सामने आई थी। मामले की शिकायत एनजीटी में पहुंची, जहां सुनवाई के दौरान बिल्डर ने दावा किया कि उसने 13,300 किलोलीटर पानी सेक्टर-54 स्थित एसटीपी से खरीदकर उपयोग किया था और फरवरी 2012 में बोरवेल हटाने की बात भी कही थी।

एनजीटी ने मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2018 में प्रतीक बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और इसकी वसूली की जिम्मेदारी सीपीसीबी को दी थी। हालांकि इतने वर्षों के बाद भी यह जुर्माना वसूल नहीं हो सका।

इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से एनजीटी में निष्पादन प्रार्थना पत्र दायर किया गया। मामले पर दोबारा सुनवाई करते हुए एनजीटी ने अब जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि आठ वर्ष पहले लगाए गए जुर्माने की राशि ब्याज सहित वसूल कर सीपीसीबी के खाते में जमा कराई जाए।

बताया जा रहा है कि प्रतीक स्टाइलोम सोसायटी में वर्ष 2012 से ही परिवार रह रहे हैं। उस समय करीब 190 परिवार यहां निवास कर रहे थे, जबकि निर्माण कार्य भी जारी था। नियमों के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान प्रति वर्ग फुट लगभग दो किलोलीटर पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन आरोप है कि इस परियोजना में इन पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

एनजीटी के इस आदेश को पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भविष्य में बिल्डरों द्वारा निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ने की संभावना है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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