Noida: ई-नीलामी नीति के विरोध में होली नहीं मनाएंगे उद्यमी, आंदोलन की चेतावनी

Noida: ई-नीलामी नीति के विरोध में होली नहीं मनाएंगे उद्यमी, आंदोलन की चेतावनी
नोएडा। जिले की औद्योगिक इकाइयों से जुड़े उद्यमियों ने भूखंड आवंटन की ई-नीलामी नीति के खिलाफ बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। इंडस्ट्रियल इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन (आईईए) ने निर्णय लिया है कि इस बार संगठन और उसके सदस्य उद्यमी अपनी-अपनी कंपनियों में होली का उत्सव नहीं मनाएंगे। यह फैसला जिले की चारों प्राधिकरण में लागू ई-नीलामी नीति के विरोध में लिया गया है।
आईईए के पदाधिकारियों का कहना है कि ई-नीलामी व्यवस्था के कारण छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों के लिए औद्योगिक भूखंड खरीदना बेहद कठिन हो गया है। संगठन का आरोप है कि इस नीति के चलते भूखंडों की कीमतें अत्यधिक बढ़ गई हैं, जिससे एमएसएमई सेक्टर पर सीधा असर पड़ रहा है।
आईईए के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि वर्तमान नीति छोटे उद्यमियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि जिले के कई उद्यमी वर्षों से अपना खुद का औद्योगिक भूखंड खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ई-नीलामी में बढ़ती बोली और ऊंची कीमतों के कारण वे पीछे रह जाते हैं। इसका परिणाम यह है कि वे या तो किराये पर उद्योग चला रहे हैं या फिर विस्तार की योजना टालने को मजबूर हैं।
उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि 2000 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंडों को ई-नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखा जाए, ताकि छोटे उद्योगों को राहत मिल सके। उनका तर्क है कि छोटे और मध्यम उद्योग क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और यदि उन्हें सस्ती दरों पर जमीन नहीं मिलेगी तो नए उद्योग स्थापित करना मुश्किल हो जाएगा।
संगठन के पूर्व अध्यक्ष पीके तिवारी, उपाध्यक्ष एचएन शुक्ला और उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह तुली सहित अन्य पदाधिकारी भी इस विरोध में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि यदि नीति में संशोधन नहीं किया गया तो उद्योगों का विकास रुक सकता है और रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
आईईए के अनुसार जिले में करीब 40 प्रतिशत उद्योग वर्तमान में किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि वे अपना भूखंड खरीदकर स्थायी ढांचा खड़ा करना चाहते हैं, लेकिन ई-नीलामी के कारण यह सपना अधूरा रह गया है। भूखंडों की बढ़ती कीमतों का असर किराये पर भी पड़ा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है।
उद्यमियों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई उद्योगों को बंद करने की नौबत आ सकती है। इससे न केवल निवेश प्रभावित होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी घट सकते हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि होली के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि इसके बाद भी सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। उद्यमियों का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि समाधान है, लेकिन यदि उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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