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New Delhi : एआई के प्रभावी उपयोग के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में समन्वय की आवश्यकता पर जोर

New Delhi : राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करते हुए संसद और राज्य विधानसभाओं के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग हेतु बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एआई विधान मंडलों की कार्यकुशलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बशर्ते इसे उपयुक्त और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक संस्थागत ज्ञान का समुचित उपयोग किया जाए।

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विधान मंडल विधायी वाद-विवादों, बजट सहित सभी आधिकारिक नीतिगत दस्तावेजों के संरक्षक होते हैं। ये दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद संस्था का अभिन्न अंग बन जाते हैं, लेकिन यह जानकारी अक्सर अलग-अलग मंत्रालयों में बिखरी रहती है। संसद और राज्य विधानसभाएं एआई के माध्यम से एक साझा मंच विकसित कर सकती हैं, जिससे यह जानकारी सर्वसुलभ हो और विधान मंडलों को एक सशक्त ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

उन्होंने विधायी वाद-विवादों की भाषा, शब्दावली और देश भर में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर भारतीय संदर्भ के अनुरूप तकनीक विकसित करने के लिए डेटा लेक की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, एआई को संसदीय उपयोग के लिए उपयुक्त बनाने वाला तत्व केवल उसकी एल्गोरिदमिक क्षमता नहीं है, बल्कि वह ज्ञान है जिसके आधार पर इस तकनीक को प्रशिक्षित किया जाता है। संसदीय ज्ञान दशकों के वाद-विवादों, निर्णयों, परंपराओं और संवैधानिक प्रथाओं से विकसित हुआ है, इसलिए एआई का प्रशिक्षण संसद के भीतर ही होना चाहिए।

उन्होंने एआई आधारित हाइब्रिड प्रणाली अपनाने की वकालत की, जिसमें एआई के प्रशिक्षण और उसके द्वारा दिए जाने वाले आउटपुट पर मानवीय निगरानी बनी रहे। साथ ही बताया कि संसद में एआई सक्षम प्रतिलेखन और बहुभाषी सेवाओं के लिए युगपत भाषांतरण का परीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में संसद सदस्य सभा की कार्यसूची और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज अपनी पसंद की भाषा में प्राप्त कर पा रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रश्नकाल के लिए प्रश्नों की ग्राह्यता की जांच, पूर्व उदाहरणों और निर्णयों की खोज जैसे नियमित प्रशासनिक कार्यों में भी एआई का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही अधिकारियों, कर्मचारियों और विधि निर्माताओं के लिए जागरूकता बढ़ाने तथा ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन में डिजिटल उपकरणों के उपयोग के साथ-साथ जवाबदेही को मजबूत करने और विधि निर्माताओं की क्षमता निर्माण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। यह सम्मेलन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति में प्रारंभ हुआ।

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