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FAIMS AIIMS Delhi: स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून लागू करे सरकार : फेम्स

FAIMS AIIMS Delhi: स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून लागू करे सरकार : फेम्स

नई दिल्ली, 4 जून। राजस्थान में डॉक्टरों पर हुए हालिया हमलों के विरोध में एम्स दिल्ली के फैकल्टी एसोसिएशन (फेम्स) ने केंद्र सरकार से देशभर के स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त केंद्रीय संरक्षण कानून लागू करने की मांग की है। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है। फेम्स ने अपने पत्र में राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ कथित मारपीट तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता के साथ हुए दुर्व्यवहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए इनकी कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ होने वाली हिंसा केवल किसी एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सेवा तंत्र और मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं पर सीधा आघात है। फेम्स के अध्यक्ष डॉ. अमरिंदर सिंह मल्ही और महासचिव डॉ. केशव गोयल ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद उनके साथ मारपीट, धमकी और दुर्व्यवहार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक हैं। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में शामिल दोषियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फेम्स ने अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि संवेदनशील अस्पताल परिसरों में पर्याप्त सुरक्षा बल, निगरानी प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र उपलब्ध होना चाहिए, जिससे चिकित्साकर्मियों को सुरक्षित वातावरण में काम करने का अवसर मिल सके। पत्र में स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा के प्रति “शून्य सहनशीलता नीति” अपनाने की मांग भी की गई है। फेम्स का मानना है कि जब तक राष्ट्रीय स्तर पर एक समान और प्रभावी कानूनी व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा। इसलिए एक केंद्रीय कानून बनाकर सभी राज्यों में समान सुरक्षा प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। एसोसिएशन ने कहा कि कोविड-19 महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर समाज की सेवा की है। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। फेम्स ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी, ताकि देशभर के डॉक्टर और अन्य चिकित्सा कर्मचारी बिना किसी भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहे।

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