Yamuna Authority: यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बड़ी राहत, 1508 एकड़ का लैंड बैंक तैयार

Yamuna Authority: यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बड़ी राहत, 1508 एकड़ का लैंड बैंक तैयार
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में औद्योगिक विकास की राह में आ रही जमीन की बड़ी अड़चन अब दूर हो गई है। प्राधिकरण ने पिछले आठ महीनों के भीतर 1508 एकड़ का मजबूत लैंड बैंक तैयार कर लिया है। नौ से अधिक औद्योगिक सेक्टरों में किसानों से जमीन खरीदकर यह लैंड बैंक विकसित किया गया है, जिस पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे यमुना सिटी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, लैंड बैंक तैयार करने की प्रक्रिया लगातार जारी है ताकि भविष्य में निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने में किसी तरह की परेशानी न हो। अब तक यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में लगभग तीन हजार औद्योगिक इकाइयों को भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के चलते इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं। देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां उद्योग स्थापित करने में रुचि दिखा रही हैं, ऐसे में जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता बन गई है।
प्राधिकरण से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से नवंबर माह के बीच औद्योगिक सेक्टर-11, 5, 8डी, 10, 8, 28, 29, 32 और 33 में यह 1508 एकड़ जमीन विभिन्न गांवों के किसानों से खरीदी गई है। इसके बदले किसानों को लगभग 2000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। औसतन हर महीने करीब 250 एकड़ जमीन खरीदी गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल औद्योगिक विकास को बल मिलेगा, बल्कि किसानों को भी आर्थिक लाभ हुआ है।
इन सेक्टरों का रणनीतिक महत्व भी काफी ज्यादा है। सेक्टर-11 में फिनटेक सिटी विकसित की जा रही है, सेक्टर-10 में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी), सेक्टर-28 में मेडिकल डिवाइस पार्क, जबकि सेक्टर-29, 32 और 33 में बड़े औद्योगिक पार्क स्थित हैं। इन प्रमुख सेक्टरों में जमीन की उपलब्धता बढ़ने से नए उद्योगों की स्थापना आसान होगी और बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्राधिकरण का फोकस औद्योगिक इकाइयों के लिए पर्याप्त लैंड बैंक तैयार करने पर है। मुख्यमंत्री औद्योगिक विस्तारित योजना के तहत राज्य सरकार से यमुना प्राधिकरण को 2000 करोड़ रुपये की सहायता मिली है, जिसे पांच वर्षों में बिना ब्याज के वापस किया जाना है। इसी राशि का उपयोग कर लैंड बैंक को लगातार बढ़ाया जा रहा है, ताकि भविष्य की विकास योजनाओं में किसी तरह की रुकावट न आए।
नए नियमों के तहत अब प्राधिकरण कोई भी विकास परियोजना तभी शुरू कर सकता है, जब संबंधित जमीन उसके कब्जे में हो। पूर्व में कई बार ऐसा हुआ है कि बिना जमीन अधिग्रहण के योजनाएं शुरू कर दी गईं, जिसके बाद किसानों के अदालत जाने से परियोजनाएं अटक गईं। इन्हीं अनुभवों से सबक लेते हुए अब लैंड बैंक तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक और संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ विकास परियोजनाओं के लिए जमीन को आसानी से उपलब्ध कराना है, जिससे औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और शहरी एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिल सके।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों को क्षेत्र में लाना है। इससे न केवल बेहतर निवेश आएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि अप्रैल माह से अब तक 1508 एकड़ जमीन किसानों से खरीदी जा चुकी है और भविष्य में भी लैंड बैंक को और बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।



