Weather Update: यूपी में 13 मौतों के बाद बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़ में नदियां उफान पर, बिहार के 19 जिलों में चेतावनी
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी से बने मौसम तंत्र के कमजोर पड़ने के बावजूद पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का असर बना हुआ है। उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में लगातार बारिश, तेज हवाओं और जलभराव की स्थिति सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 48 घंटे से कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है और अलग-अलग घटनाओं में 13 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए देश के कई हिस्सों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। बारिश और तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। खेतों में पानी भरने और फसलों के नुकसान के साथ-साथ कई जगहों पर सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में लगातार हो रही बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल रही हैं। कई स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवाओं का असर देखा गया है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ी है और कई जगहों पर लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश से जुड़ी घटनाओं में उत्तर प्रदेश में 13 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा राज्य के करीब 32 जिलों में बाढ़ का खतरा बताया जा रहा है। लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों के जलस्तर में वृद्धि होने की आशंका है, जिसके चलते प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने की जरूरत बढ़ गई है।
किसानों के लिए भी मौसम की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। खेतों में पानी जमा होने से खड़ी फसलों पर असर पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों में लगातार बारिश के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं और किसानों को आगे मौसम की स्थिति पर नजर रखनी पड़ रही है।
बिहार में भी मौसम विभाग की ओर से बारिश और गरज-चमक को लेकर चेतावनी जारी की गई है। राज्य के 19 जिलों में यलो अलर्ट बताया गया है। कई इलाकों में बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं। बस्तर इलाके में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश के कारण छोटे-बड़े नदी-नाले उफान पर हैं। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि खेतों में भी जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। कुछ इलाकों में पानी घरों तक पहुंचने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
जगदलपुर में इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पुराने पुल के पास नदी खतरे के निशान के ऊपर बहने की स्थिति में पहुंच गई है। नदी किनारे बसे लालबाग, डोंगाघाट और श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड जैसे इलाकों में भी पानी भरने की जानकारी सामने आई है। स्थिति को देखते हुए लोग अपने परिवार के बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।
राजधानी रायपुर में भी लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। महादेवघाट के पास खारुन नदी का पुल पानी में डूब गया है। पिछले कई घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित हुई है।
गरियाबंद जिले में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला है। जिले की प्रमुख नदियों पैरी, सौंदर और महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा छोटे नदी-नाले भी उफान पर हैं। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में शबरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़कर चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया है। नदी का पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो आसपास के इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है। सुकमा को ओडिशा से जोड़ने वाले मार्ग पर भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है और कुछ पुलों के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बनी हुई है।
मौसम की इस स्थिति का असर ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इन राज्यों के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने से स्थानीय स्तर पर जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
मौसम तंत्र के कमजोर होने के बावजूद उसका प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके कारण पूर्वी भारत से लेकर मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर बना हुआ है। विशेषज्ञों और मौसम एजेंसियों की निगाह इस बात पर है कि यह सिस्टम अगले कुछ दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका बारिश के वितरण पर कितना असर पड़ता है।
इस बीच प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती नदी किनारे बसे लोगों और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लगातार बारिश के बीच राहत और बचाव दलों को तैयार रखा जा रहा है। कई स्थानों पर स्थानीय प्रशासन की टीमें जलस्तर की निगरानी कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 26 और 27 सितंबर को भी कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। बिहार में 26 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी है। दिल्ली-हरियाणा क्षेत्र में भी 26 और 27 सितंबर को भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। इसके बाद कई क्षेत्रों में मौसम में सुधार की उम्मीद है, हालांकि स्थानीय स्तर पर बारिश का असर बना रह सकता है।
बारिश के इस दौर में आम लोगों के लिए जलभराव वाले रास्तों से बचना, बिजली गिरने के दौरान खुले क्षेत्रों से दूर रहना और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा। नदी और नालों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आसपास जाने से भी बचने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल देश के कई राज्यों में मौसम की स्थिति पर प्रशासन और मौसम विभाग की लगातार नजर बनी हुई है।


