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Himachal cabinet decisions: हिमाचल कैबिनेट के ऐतिहासिक फैसले, स्वास्थ्य-शिक्षा से लेकर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर तक बड़े निर्णय

Himachal cabinet decisions: हिमाचल कैबिनेट के ऐतिहासिक फैसले, स्वास्थ्य-शिक्षा से लेकर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर तक बड़े निर्णय

शिमला में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में हिमाचल प्रदेश के समग्र विकास को गति देने वाले कई अहम और दूरगामी निर्णय लिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, युवाओं को रोजगार देने, शिक्षा व्यवस्था सुधारने, ग्रामीण और शहरी विकास के साथ-साथ ऊर्जा, दुग्ध उत्पादन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सरकार ने बड़े फैसलों पर मुहर लगाई।

मंत्रिमंडल ने राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 53 पद और विभिन्न श्रेणियों के 121 पद भरने का निर्णय लिया है, जिनमें टीचिंग और नॉन-टीचिंग फैकल्टी के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं। इसके अलावा असिस्टेंट स्टाफ नर्सिंग पॉलिसी के तहत हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से 600 असिस्टेंट स्टाफ नर्स के पद सृजित करने को भी मंजूरी दी गई। बैठक में डॉक्टरेट ऑफ मेडिसन और मास्टर ऑफ चिरुरगिया की योग्यता प्राप्त फैकल्टी डॉक्टरों को बेसिक पे का 20 प्रतिशत इंसेंटिव देने का भी निर्णय लिया गया, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रोत्साहन मिलेगा।

युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में जल शक्ति विभाग में जॉब ट्रेनी और जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 40 रिक्त पदों को भरने की स्वीकृति दी गई, वहीं ग्रामीण विकास विभाग में सीधे भर्ती के माध्यम से खंड विकास अधिकारी के 10 पदों को भरने का फैसला लिया गया। शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 100 चिन्हित सीबीएसई स्कूलों के लिए भर्ती, प्रशिक्षण, कार्यकाल और प्रदर्शन मूल्यांकन मानदंडों के साथ एक समर्पित सब-कैडर बनाने को भी मंजूरी प्रदान की गई।

सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए मंत्रिमंडल ने धर्मशाला के टोंग-लेन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और ऐसे बच्चों को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना में शामिल करने का निर्णय लिया, जिनके दोनों या एक जीवित माता-पिता 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग हैं। इसके साथ ही उन बच्चों को भी योजना के तहत शामिल किया जाएगा, जिनके माता-पिता में से एक की मृत्यु हो चुकी है और दूसरे ने बच्चे का परित्याग कर दिया है।

शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मंत्रिमंडल ने शीतलपुर में हिमाचल और चंडीगढ़ की सीमा पर एक विश्व स्तरीय टाउनशिप विकसित करने की मंजूरी दी। साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने, पारदर्शिता लाने और विवादों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) रूल्स 2017 के नियम-3 में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई।

ऊना जिले के पालकवाह खास में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कल्याण बोर्ड की स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग को एसडीआरएफ के उपयोग के लिए स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। वहीं हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में चरवाहों की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए एक विशेष परियोजना को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना, चरवाहा प्रथाओं का आधुनिकीकरण करना और स्वदेशी पशु नस्लों का संरक्षण करना है। इसके तहत चरवाहों और उनके पशुधन की सुचारू आवाजाही के लिए नया कानून लाया जाएगा और वन भूमि व घास के मैदान चरावाह पशुओं के लिए खोले जाएंगे।

दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिल्कफेड और राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड के सहयोग से नाहन, नालागढ़, मोहाल और रोहड़ू में दूध प्रसंस्करण संयंत्र, हमीरपुर के जलाड़ी में मिल्क चिलिंग सेंटर, ऊना के झलेड़ा में बल्क मिल्क कूलर तथा करसोग और पांगी में नई दुग्ध अधोसंरचना स्थापित करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड लिमिटेड को वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए 60 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट देने की मंजूरी दी गई, ताकि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करते हुए मंत्रिमंडल ने सभी पांच सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एप्लाइड साइंसेज और ह्यूमैनिटीज के असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर पदों को कार्यात्मक रूप से इंटरचेंजेबल मानने और फंक्शनल इक्विवेलेंस मॉडल अपनाने का निर्णय लिया। इसके अलावा बिलासपुर जिले के घुमारवीं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर मल्टीडिसिप्लिनरी इंस्टीट्यूट ऑफ इनोवेशन, स्किल, टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी की स्थापना को भी मंजूरी दी गई।

मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश भूमि संरक्षण अधिनियम 1978 में संशोधन को स्वीकृति दी, जिससे प्राकृतिक आपदाओं या बीमारी के कारण सूखे चीड़ के पेड़ों की कटाई सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से की जा सकेगी। साथ ही राजीव गांधी लघु दुकानदार सुख कल्याण योजना (शहरी) में संशोधन कर एनपीए घोषित छोटे दुकानदारों के दो लाख रुपये तक के ऋण पर अधिकतम एक लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता देने का फैसला लिया गया।

अन्य फैसलों में हिमाचल प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का मुख्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करना, कांगड़ा जिले के इंदौरा क्षेत्र के मलोट में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करना, मुख्यमंत्री लोक भवन योजना के तहत निर्माणाधीन लोक भवनों को रियायत देना और स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति-2021 में संशोधन शामिल हैं। इसके अलावा एसजेवीएनएल की नाथपा झाकड़ी और रामपुर जल विद्युत परियोजनाओं में इक्विटी ऊर्जा हिस्सेदारी राज्य सरकार को पुनः आवंटित करने की मंजूरी दी गई। शिक्षा विभाग में अनुकंपा के आधार पर 28 आश्रितों को रोजगार देने और बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र में आधुनिक वाणिज्यिक परिसरों के निर्माण को भी हरी झंडी दी गई।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में फ्रेंच विकास एजेंसी के सहयोग से 892 करोड़ रुपये की लागत वाली हिमाचल प्रदेश आपदा प्रभावित न्यूनीकरण एवं तैयारी परियोजना को स्वीकृति दी गई। वहीं राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के तहत स्टेज कैरिज सेवाओं के लिए 18 से 42 सीटर बसों की खरीद पर अनुदान देने का भी फैसला लिया गया।

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