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VG Siddhartha Death: आयकर विभाग के कथित उत्पीड़न और दबाव पर फिर उठा सवाल, वीजी सिद्धार्थ के बाद कर्नाटक में एक और मौत ने बढ़ाई बहस

VG Siddhartha Death: आयकर विभाग के कथित उत्पीड़न और दबाव पर फिर उठा सवाल, वीजी सिद्धार्थ के बाद कर्नाटक में एक और मौत ने बढ़ाई बहस

बेंगलुरु। कर्नाटक में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद कथित तौर पर सीजे रॉय की मौत के मामले ने एक बार फिर कर कार्रवाई और उद्यमियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार नहीं है जब राज्य में आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद किसी कारोबारी की मौत को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले वर्ष 2019 में कैफे कॉफी डे के संस्थापक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वीजी सिद्धार्थ ने भी अपनी आत्महत्या के लिए आयकर विभाग द्वारा कथित उत्पीड़न को जिम्मेदार ठहराया था।

वीजी सिद्धार्थ, जो कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद भी थे, ने आत्महत्या से पहले एक भावुक पत्र लिखा था। उस पत्र में उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानियों, निजी निवेशकों के दबाव और आयकर विभाग की कार्रवाइयों का विस्तार से जिक्र किया था। सिद्धार्थ ने लिखा था कि एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर के दबाव में उन्हें अपने शेयर वापस खरीदने पड़े, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पहले से कमजोर हो गई। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया था कि आयकर विभाग के एक पूर्व महानिदेशक ने दो अलग-अलग मौकों पर उनके शेयर जब्त कर लिए, जिससे उन्हें अत्यधिक मानसिक और आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ा।

सिद्धार्थ ने अपने पत्र में यह भी कहा था कि इन कार्रवाइयों के कारण कंपनी गंभीर नकदी संकट में फंस गई और वह हालात के आगे घुटने टेकने को मजबूर हो गए। आयकर विभाग ने 2018 और 2019 के दौरान सिद्धार्थ और उनकी कंपनियों पर कई बार छापेमारी की थी, जिसे लेकर उस समय भी देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।

वीजी सिद्धार्थ की मौत के बाद कर्नाटक में तत्कालीन विपक्ष में रही कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए इसे “कर आतंक” करार दिया था। कांग्रेस का आरोप था कि इस तरह की आक्रामक कर कार्रवाइयों से न केवल कारोबारियों पर मानसिक दबाव बढ़ता है, बल्कि देश के उद्यमशील माहौल को भी नुकसान पहुंचता है। पार्टी ने यह भी कहा था कि डर और अस्थिरता का माहौल निवेश और नवाचार को कमजोर करता है।

अब बेंगलुरु में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद सीजे रॉय की कथित मौत ने एक बार फिर उसी बहस को हवा दे दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच एजेंसियों की कार्रवाई में संवेदनशीलता और संतुलन की कमी है, और क्या इस तरह के दबाव कारोबारी समुदाय के लिए घातक साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर चोरी पर सख्ती जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान मानवीय पहलू और मानसिक प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

यदि आप मानसिक तनाव, अवसाद या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहे हैं, तो कृपया सहायता लेने में संकोच न करें। भारत में 24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाएं मौजूद हैं। आप किरण हेल्पलाइन 1800-599-0019 पर या आरोग्य सहायवाणी 104 पर संपर्क कर सकते हैं। समय पर मदद लेना बेहद जरूरी है।

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