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Vande Mataram 150 years: जन-जन के साथ ‘वन्दे मातरम्’: सेंट्रल पार्क में भारतीय सेना सिम्फनी बैंड की संगीतमय राष्ट्रभक्ति

Vande Mataram 150 years: जन-जन के साथ ‘वन्दे मातरम्’: सेंट्रल पार्क में भारतीय सेना सिम्फनी बैंड की संगीतमय राष्ट्रभक्ति

नई दिल्ली, 20 जनवरी। भारत के गौरवशाली राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राजधानी दिल्ली के सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस में देशभक्ति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर भारतीय सेना के सिम्फनी बैंड ने एक विशेष संगीतमय प्रस्तुति देकर राष्ट्र को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में आयोजित किए जा रहे समारोहों की श्रृंखला का अहम हिस्सा रहा, जिसने बड़ी संख्या में मौजूद नागरिकों और पर्यटकों को देशप्रेम की भावना से सराबोर कर दिया।

भारतीय सेना सिम्फनी बैंड की इस प्रस्तुति में चयनित संगीत रचनाओं के माध्यम से ‘वन्दे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका और आधुनिक भारत में इसकी प्रासंगिकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। संगीत की हर धुन में देश की मिट्टी की खुशबू और बलिदान की गूंज साफ सुनाई दे रही थी। यह गीत न केवल स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा बना, बल्कि आज भी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना हुआ है।

कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त और प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल समारोहों तक सीमित नहीं, बल्कि वह जन-जन के हृदय में बसती है। कार्यक्रम के दौरान राह चलते लोग, परिवार, युवा और पर्यटक सभी रुककर इस संगीतमय प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आए। तालियों की गूंज और चेहरे पर दिखती गर्व की मुस्कान यह दर्शा रही थी कि ‘वन्दे मातरम्’ आज भी हर भारतीय को एक सूत्र में बांधने की ताकत रखता है।

इस आयोजन के माध्यम से भारतीय सेना ने एक बार फिर यह साबित किया कि वह केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रभक्ति और परंपराओं को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह संगीतमय श्रद्धांजलि न सिर्फ एक कार्यक्रम थी, बल्कि देश के प्रति समर्पण और एकता की भावना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरी।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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