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US tariff impact India: US Tariff के बाद Iran–Israel तनाव से भारतीय निर्यातकों पर दोहरी मार, शिपिंग लागत 50% तक बढ़ी

US tariff impact India: US Tariff के बाद Iran–Israel तनाव से भारतीय निर्यातकों पर दोहरी मार, शिपिंग लागत 50% तक बढ़ी

उत्तर प्रदेश के Noida सहित देशभर के निर्यातकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले अमेरिकी टैरिफ के कारण भारी नुकसान झेल रहे भारतीय उद्योगों को अब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग संगठनों का दावा है कि अमेरिकी शुल्कों से पहले ही करीब सात हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है, और अब पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, Strait of Hormuz को लेकर ईरान की चेतावनी ने वैश्विक व्यापार मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और बड़े हिस्से के समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां तनाव बढ़ने से जहाजरानी कंपनियां वैकल्पिक और लंबे समुद्री मार्ग अपनाने को मजबूर हो रही हैं, जिससे शिपिंग लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।

निर्यातकों का कहना है कि यूरोप और मध्य पूर्व के बाजारों तक पहुंचने के लिए अब अफ्रीका के चारों ओर लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे न केवल परिवहन खर्च बढ़ेगा, बल्कि डिलीवरी में देरी की आशंका भी रहेगी। समय पर माल नहीं पहुंचने पर खरीदार ऑर्डर रद्द कर सकते हैं या भुगतान में कटौती और पेनाल्टी लगा सकते हैं, जिससे पहले से दबाव में चल रहे निर्यातकों को और झटका लग सकता है।

इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित उपाध्याय का कहना है कि ईरान-इजरायल क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा कीमतों और बीमा प्रीमियम पर साफ दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ेगा। उनका मानना है कि प्रत्यक्ष प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला पर अप्रत्यक्ष असर व्यापक होगा।

इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के कारण टेक्सटाइल, फार्मा और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों पर 25 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था, जिससे निर्यात में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आई। अब पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात से स्थिति और बिगड़ सकती है। यदि हार्मुज मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और माल ढुलाई दोनों प्रभावित होंगे, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

निर्यातकों के अनुसार, बढ़ती शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम में वृद्धि और डिलीवरी में अनिश्चितता के चलते आने वाले महीनों में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। उद्योग जगत ने केंद्र सरकार से अपील की है कि निर्यातकों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज, सब्सिडी या वैकल्पिक व्यापार मार्गों की रणनीति पर विचार किया जाए, ताकि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय निर्यात को संभाला जा सके।

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