RTE Admission: आरटीई के तहत जिले में 14 हजार से ज्यादा सीटों पर गरीब बच्चों को मिलेगा दाखिला

RTE Admission: आरटीई के तहत जिले में 14 हजार से ज्यादा सीटों पर गरीब बच्चों को मिलेगा दाखिला
नोएडा जिले में शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया के लिए सीटों की मैपिंग पूरी कर ली गई है। इस बार जिले के 1264 निजी विद्यालयों में 14 हजार 100 से अधिक सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है, जिससे ज्यादा बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, इस साल 103 नए विद्यालय आरटीई के दायरे में आए हैं और सीटों की संख्या में लगभग एक हजार की बढ़ोतरी हुई है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन के निर्देश पर नवंबर महीने में मैपिंग प्रक्रिया शुरू की थी, जो 30 नवंबर तक चली। इसके बाद दिसंबर में पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की गई। समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया कि जिले में आरटीई के तहत निजी स्कूलों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष जिले में 1161 निजी विद्यालयों में करीब 13 हजार सीटें घोषित की गई थीं, लेकिन चार चरणों में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद केवल 4,267 गरीब विद्यार्थियों को ही दाखिला मिल पाया था।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने बताया कि इस बार आवेदन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, इस वर्ष छात्रों को आवेदन के लिए पांच चरण दिए जाएंगे, जिससे ज्यादा बच्चों को मौका मिल सके। आवेदन करते समय छात्र के आधार कार्ड के साथ-साथ माता-पिता का आधार कार्ड अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैंक खाता भी आधार कार्ड से लिंक होना जरूरी किया गया है।
बीएसए ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थी केवल अपने गांव या निर्धारित क्षेत्र के स्कूलों में ही आवेदन कर सकेंगे। अपने गांव या क्षेत्र से बाहर के स्कूलों में किए गए आवेदन स्वतः निरस्त कर दिए जाएंगे। एक छात्र केवल एक ही आवेदन कर सकता है, यदि एक से अधिक आवेदन पाए गए तो सभी आवेदन रद्द कर दिए जाएंगे। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी आवेदन में फर्जी दस्तावेज पाए गए तो संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था और सख्त नियमों के चलते इस बार आरटीई के तहत ज्यादा गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला मिल सकेगा और शिक्षा के अधिकार का उद्देश्य बेहतर तरीके से पूरा होगा।





