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Lok Sabha Election 2024: अखिलेश यादव इन दो सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जिम्मेदारी भाई धर्मेंद्र यादव की है

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के खिलाफ इंडिया गठबंधन अपने पत्ते खोल रहा है. समाजवादी पार्टी ने पहले ही 31 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया था. लेकिन अब सूत्रों की माने तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव दो सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं. इन दोनों ही सीटों पर उन्होंने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को प्रभारी बनाया है.

सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव अब आजमगढ़ और कन्नौज, दोनों ही सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. इन दोनों ही सीटों से अखिलेश यादव सांसद रहे चुके हैं. वहीं इन दोनों ही सीटों पर प्रभारी की जिम्मेदारी अखिलेश यादव ने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को दी है. आजमगढ़ में जीत दर्ज करने के लिए वहां के मजबूत नेता गुड्डू जमाली को बीते दिनों ही पार्टी में शामिल कराया है.

जानकारों की माने तो इसी वजह से आजमगढ़ के दो नेता गुड्डू जमाली और बलराम यादव को पार्टी ने विधान परिषद भेजने का फैसला किया है. हालांकि अभी तक इनके नाम का औपचारिक एलान नहीं किया गया है. सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव ने कन्नौज में अपने समर्थकों को तैयारी करने के लिए संदेश दे दिया है.

धर्मेंद्र यादव की जगह चाचा शिवपाल उम्मीदवार

गौरतलब है कि सपा बीते महीने अपने 31 प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया था. पार्टी ने कैराना से इकरा हसन, बदायूं से शिवपाल सिंह यादव, बरेली सीट से प्रवीण सिंह ऐरन, हमीरपुर से अजेंद्र सिंह राजपूत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने वाराणसी से सुरेंद्र सिंह पटेल पर दांव लगाया था. तब धर्मेंद्र यादव की जगह पार्टी ने चाचा शिवपाल यादव को उम्मीदवार बनाया था.

बता दें कि सपा इस बार कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को 17 लोकसभा सीट दी है. इस गठबंधन में चंद्रशेखर आजाद की पार्टी का रहना तय माना जा रहा है.

मीनाक्षी लेखी, हर्षवर्धन, रमेश बिधूड़ी, प्रवेश सिंह वर्मा… दिल्ली के इन बड़े चेहरों को BJP ने बेटिकट क्यों कर दिया?

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बीजेपी ने दिल्ली की सात में से पांच सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. मनोज तिवारी को छोड़ दें तो पार्टी ने पांच में से चार सीटों पर नए चेहरे मैदान में उतारे हैं. मीनाक्षी लेखी, डॉक्टर हर्षवर्धन, प्रवेश सिंह वर्मा और रमेश बिधूड़ी जैसे नेता बेटिकट हो गए हैं. पार्टी ने दिल्ली के इन बड़े नेताओं को बेटिकट क्यों कर दिया?

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने लोकसभा चुनाव के लिए 195 उम्मीदवारों की भारी-भरकम लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की सात में से पांच सीटों के लिए भी उम्मीदवारों के नाम हैं. दिल्ली की पांच में से चार सीटों पर पार्टी ने इस बार नए चेहरों को मैदान में उतारा है. नॉर्थ ईस्ट दिल्ली सीट से मनोज तिवारी को छोड़ दें तो अब तक घोषित नामों में 2019 के चुनाव में जीते किसी भी चेहरे को पार्टी ने रिपीट नहीं किया है. विदेश राज्यमंत्री मंत्री मीनाक्षी लेखी, रमेश बिधुड़ी और प्रवेश सिंह वर्मा के साथ ही डॉक्टर हर्षवर्धन जैसे दिग्गज नेता भी अपना टिकट नहीं बचा पाए.

बीजेपी की लिस्ट आने के बाद से ही इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म है. मीनाक्षी लेखी, हर्षवर्धन, रमेश बिधुड़ी और परवेश सिंह वर्मा जैसे नेताओं के टिकट कटने को लेकर कोई बयानबाजियों को वजह बता रहा है तो कोई परफॉर्मेंस को कमजोर कड़ी. लगातार दो बार सांसद इन नेताओं के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी की बात भी हो रही है तो कार्यकर्ताओं से जुड़ाव को भी मानक बताया जा रहा. बीजेपी की राजनीति का जो सांचा रहा है, उसे देखते हुए ऐसा लगता नहीं है कि बात बस इतनी सी ही है. सवाल यह उठ रहे हैं कि फिर इन नेताओं के टिकट काटने की पीछे पार्टी की रणनीति क्या है?

राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि दिल्ली के लिए बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट में मुझे विधानसभा चुनाव की तैयारी नजर आ रही है. दिल्ली बीजेपी यूनिट अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है, धरना-प्रदर्शन कर रही है लेकिन लोकल लीडरशिप में बड़े चेहरों के अभाव से उसका उतना इम्पैक्ट पड़ता नजर नहीं आ रहा जितनी पार्टी को उम्मीद है. एक बड़ा कारण दिल्ली बीजेपी में केजरीवाल को चुनौती दे पाने वाले बड़े कद के नेता का अभाव भी है. पिछले कुछ दिनों में शराब घोटाले और अन्य मुद्दों को लेकर जिस तरह से आम आदमी पार्टी के दामन पर कथित भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं, बीजेपी की रणनीति अब उसे और आगे ले जाने की होगी लेकिन उसके लिए बड़े कद का नेता भी होना चाहिए.

दिल्ली चुनाव में अभी करीब एक साल का समय बचा है. बीजेपी की जिस तरह की कार्यशैली रही है, पार्टी उन राज्यों और उन सीटों पर फोकस कर चुनाव आने का इंतजार किए बिना तैयारी में जुट जाती है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सरकार चला रही है. ऐसे में 10 साल की एंटी इनकम्बेंसी और कथित शराब घोटाले, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जैसे वरिष्ठ मंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं तो वहीं संजय सिंह जैसे फायरब्रांड नेता भी जेल में हैं.

बीजेपी को 10 साल की एंटी इनकम्बेंसी और केजरीवाल सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1998 से चला आ रहा सत्ता का सूखा समाप्त होने की उम्मीद नजर आ रही है. बीजेपी की यह उम्मीद आधारहीन भी नहीं. 2015 के विधानसभा चुनाव में 32.3 फीसदी वोट शेयर के साथ महज तीन सीटों पर सिमट गई बीजेपी ने 2020 में 38.7 फीसदी वोट शेयर के साथ आठ सीटें जीत ली थीं. बीजेपी का वोट शेयर 2015 के मुकाबले छह फीसदी से अधिक बढ़ा तो वहीं आम आदमी पार्टी के वोट शेयर में भी 2015 के मुकाबले मामूली इजाफा हुआ था. 2015 में जहां आम आदमी पार्टी को 54.5 फीसदी वोट मिले थे वहीं 2020 में बढ़कर ये 55 फीसदी पर पहुंच गया था.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी ईडी की रडार पर हैं और बीजेपी नेतृत्व को लग रहा है कि अगर लोकल लीडरशिप मजबूत रही तो आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाया जा सकता है. बीजेपी ऐसी पार्टी है जो किसी नेता को कभी केंद्र से राज्यों की राजनीति में भेज देती है तो कभी राज्यों से नेताओं को दिल्ली में लाकर एक्टिव कर देती है.

बीजेपी की इमेज भूमिका में बदलाव करते रहने वाली पार्टी की है. अब सवाल यह भी है कि हर्ष वर्धन को तो पार्टी दिल्ली की राजनीति में भी आजमा चुकी है. फिर उनके साथ रमेश बिधुड़ी, प्रवेश सिंह वर्मा के टिकट काटने के पीछे क्या रणनीति हो सकती है?  इसे समझने से पहले इसे लेकर जो बातें चल रही हैं, उनकी चर्चा भी जरूरी है. दरअसल, मीनाक्षी लेखी का टिकट कटने के बाद हाल ही में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हुई जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी ने इसे किसानों के अपमान से जोड़ दिया.

आरएलडी के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने यह कहा था कि किसानों का अपमान करने वाली मीनाक्षी लेखी का टिकट कटा. दरअसल, मीनाक्षी लेखी ने ‘किसान संसद’ में एक मीडियाकर्मी पर हुए कथित हमले को लेकर कहा था कि वे किसान नहीं, मवाली हैं. ये आपराधिक कृत्य है. इस बयान को लेकर मीनाक्षी लेखी विपक्ष और किसान नेताओं के निशाने पर आ गई थीं. विवाद बढ़ा तो उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया था.

इसी तरह रमेश बिधूड़ी का टिकट कटने के लिए संसद में बसपा सांसद दानिश अली पर उनकी टिप्पणी को आधार बताया जा रहा है. प्रवेश सिंह वर्मा को टिकट नहीं देने के पीछे दिल्ली दंगों के समय हेट स्पीच को वजह बताया जा रहा है. लेकिन इस तरह की चर्चा इसलिए भी बेदम नजर आती है क्योंकि पार्टी ने रमेश बिधूड़ी को उसी समय राजस्थान चुनाव में टोंक का प्रभारी बना दिया था जब उनके बयान पर सियासी घमासान मचा था.

रमेश बिधूड़ी गुर्जर जाति से आते हैं. दिल्ली में गुर्जर समाज की अनुमानित आबादी करीब सात फीसदी है. रमेश बिधूड़ी अपने बयानों से भले ही विवादों में रहते हों, गुर्जर समाज में उनकी पैठ मजबूत मानी जाती है. अगर उन्हें विधानसभा चुनाव में किसी सीट से मैदान में उतारा जाता है तो इसका संदेश न सिर्फ उस सीट, बल्कि आसपास की सीटों पर भी जाएगा. इसी तरह प्रवेश सिंह वर्मा पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं. प्रवेश भी अपने बयानों से विवादों में रहते हैं. अब अगर बीजेपी इन नेताओं को दिल्ली चुनाव में उम्मीदवार बनाने की सोच रही है तो साफ है कि रणनीति जनता को एक संदेश देने की ही होगी. बड़े नेताओं, सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने का यह फॉर्मूला हालिया चुनावों में सफल भी रहा था.

योगी सरकार ने यूपी को लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा तोहफा दिया, एक वर्ष पुराना बिल माफ किया जाएगा!

उत्तर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की खबरों के बीच योगी सरकार के मंत्रीमंडल की मंगलवार को बैठक होगी. मंगलवार सुबह11 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक बुलाई है. इसमें करीब 12 प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है. इसमें ट्यूबवेल उपभोक्ताओं को फ्री बिजली देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है. इसके बाद अप्रैल 2023 से ट्यूबवेल उपभोक्ताओं के बिल माफ हो जाएंगे.

सूत्रों की मानें तो योगी कैबिनेट की बैठक में 21 प्रस्ताव पर चर्चा  होगी. इसके अलावा प्रदेश में ग्रीन हाईड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित करने हेतु “उ०प्र० ग्रीन हाईड्रोजन नीति 2024” का प्रस्ताव पेश हो सकता है. लखनऊ मेट्रो के सेकेंड फेज निर्माण का प्रस्ताव आ सकता है. वहीं उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र एवं अन्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों का गठन का प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाया जा सकता है.

किसानों पर मेहरबान योगी सरकार

योगी सरकार ने बीते कुछ दिनों के दौरान किसानों को लेकर कई बड़े फैसले किए हैं जिन्हें अब आगामी चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को फील्ड में जाकर ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की फसलों को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए सर्वे करने का निर्देश दिया था. सोमवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी हरकत में नजर आए.

’15 जून तक खाली करें राउज एवेन्यू स्थित पार्टी दफ्तर…’, AAP को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका

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शीर्ष अदालत के मुताबिक राउज एवेन्यू स्थित आम आदमी पार्टी का दफ्तर दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है. इस जमीन का उपयोग राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर के विस्तार के लिए होना था. यहां एक अतिरिक्त कोर्टरूम का निर्माण होना है.

सुप्रीम कोर्ट से आम आदमी पार्टी को झटका लगा है. अब उसे राउज एवेन्यू स्थित अपना दफ्तर 15 जून तक खाली करना होगा. शीर्ष अदालत ने आम आदमी पार्टी को 15 जून तक दफ्तर खाली करने का आदेश दिया है. आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी को दफ्तर खाली करने के लिए तीन महीने की मोहलत दी है. चुनाव के बाद उसे जगह खाली करनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपना दफ्तर खोलने के लिए जमीन के संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष आवेदन करे. शीर्ष अदालत के मुताबिक राउज एवेन्यू स्थित आम आदमी पार्टी का दफ्तर दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है. इस जमीन का उपयोग राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर के विस्तार के लिए होना था. यहां एक अतिरिक्त कोर्टरूम का निर्माण होना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आगामी चुनावों के मद्देनजर हम आपको तीन महीने का अतिरिक्त समय दे रहे हैं. उसके बाद यह जमीन खाली करनी होगी’.

‘नई जमीन के लिए L&DO में आवेदन करे AAP’

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने AAP को अपने कार्यालय के लिए वैकल्पिक भूमि के आवंटन के लिए लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) से संपर्क करने को कहा. अदालत ने AAP से कहा, ‘वर्तमान भूमि पर कब्जा जारी रखने का आपके पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है. हम एलएंडडीओ से आपके आवेदन पर कार्रवाई करने और 4 सप्ताह की अवधि के भीतर अपना निर्णय बताने का अनुरोध करेंगे’.

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में आम आदमी पार्टी का पक्ष रखा. उन्होंने तर्क दिया कि AAP को राष्ट्रीय पार्टी होने का दर्जा प्राप्त है, लेकिन उसे अन्य राष्ट्रीय दलों की तुलना में दफ्तर के लिए कम अनुकूल परिसर आवंटित किया गया है. उसे बदरपुर में जमीन दी जा रही है, जबकि बाकी सभी दलों के दफ्तर बेहतर स्थानों पर हैं. शीर्ष अदालत ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का संज्ञान लिया और जगह खाली करने के लिए आम आदमी पार्टी को लोकसभा चुनावों के बाद 15 जून 2024 का समय दिया.

दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित कार्यालय पर SC के आदेश पर AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने क​हा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास विभाग को आम आदमी पार्टी को जमीन आवंटित करने का भी निर्देश दिया है. हम बस यही आशा करते हैं कि भाजपा कोई प्रतिकूल और नकारात्मक साजिश नहीं करेगी और हमें भी उसी क्षेत्र में जमीन आवंटित करेगी जहां अन्य राष्ट्रीय दलों के कार्यालय हैं’.

UP MLC Election 2024: सपा ने एमएलसी चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, जानिए किसे टिकट मिला

लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में एक बार फिर सियासी जंग देखने को मिल रही है. अब राज्य में एमएलसी चुनाव को लेकर हर पार्टी अपनी रणनीति को धार देने में लगी हुई है. इस चुनाव के लिए सोमवार से नामांकन शुरू हो गया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने चुनाव के लिए अपने तीन प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया है.

सपा ने यूपी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और पूर्व मंत्री बलराम यादव के अलावा शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली पर भरोसा जताया है. बीते दिनों ही गुड्डू जमाली बीएसपी छोड़कर सपा में शामिल हुए थे. जिसके बाद अब सपा ने उन्हें अपना एमएलसी उम्मीदवार बनाय है. सपा के तीन उम्मीदवारों की इस चुनाव में जीत तय मानी जा रही है.

वहीं सपा के अलावा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से आरएलडी ने भी अपने एक उम्मीदवार के नाम का एलान कर दिया है. आरएलडी ने इस चुनाव के लिए योगेश चौधरी को अपना उम्मीदवार बनया है. सूत्रों की माने तो एनडीए से अपना दल एस के प्रत्याशी के तौर पर योगी सरकार के मंत्री आशीष पटेल भी इस चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं.

कब होगी वोटिंग?

गौरतलब है कि यूपी में विधान परिषद की 13 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है. इसके लिए नामांकन सोमवार को शुरू हो गया है. सभी 13 सीटों के लिए 21 मार्च को वोटिंग होगी और उसी दिन वोटों की गिनती भी होगी. जबकि आगामी 11 मार्च तक इस चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. जबकि 12 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 14 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकेंगे.

बता दें कि इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की दस सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. एक सीट पर जयंत चौधरी ने उम्मीदवार खड़ा कर दिया है. वहीं आशीष पटेल का कार्यकाल खत्म हो रहा है और वह योगी सरकार में मंत्री हैं इस वजह से उनका फिर विधान परिषद जाना तय माना जा रहा है.

आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों को दिल्ली HC का संदेश, बच्ची की मौत पर जारी किया नोटिस

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दिल्ली के तुग्लक लेन क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले में एक डेढ़ साल की बच्ची की मौत हो गई थी. उसके पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई के बाद दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है. बच्ची के पिता ने 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों को लेकर चिंता जताई है. कुत्तों का शिकार हुई एक मासूम बच्ची के पिता की अर्जी पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने से वे उसी इलाके में बस जाते हैं. बाद में वो लोगों पर हमले करते हैं. लोगों को इसपर ध्यान देना चाहिए.

हाईकोर्ट ने कहा कि समस्या यह है कि लोग वैन में आते हैं. कुत्तों को खाना खिलाते हैं. यही कारण है कि ये कुत्ते कहीं और नहीं जा रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि कुत्ते बहुत अधिक क्षेत्रीय हो गए हैं. यही कारण है कि वे वहां आने वाले किसी भी नए या अजनबी पर हमला कर देते हैं.

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 महीने की बेटी के पिता की याचिका पर दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर हफ्ते भर में जवाब मांगा है. हाल ही में कुत्ते के क्रूर हमले के कारण बच्ची की मौत हो गई थी. दिल्ली हाईकोर्ट अब मामले की सुनवाई 13 मार्च को करेगा.

बच्ची के पिता ने मांगा 50 लाख का मुआवजा

बच्ची के पिता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कुत्तों के हमले में बेटी की मौत के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा मांगा है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली सरकार समेत दिल्ली पुलिस और एनडीएमसी को नोटिस जारी की है. अदालत ने कहा, “वे पैदल चलने वालों के लिए खतरा बन रहे हैं और आवारा कुत्तों को खाना खिलाना एक ऐसी चीज है जिस पर लोगों को ध्यान देने की जरूरत है.”

आवारा कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

बच्ची के पिता ने अपनी याचिका में अथॉरिटी को यह आदेश देने की भी मांग की है कि अथॉरिटी इन आवारा कुत्तों की व्यवस्था करे ताकि इसी तरह के मामले सामने ना आएं, जिससे मौत तक हो जाती है. याचिका में एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल, 2023 के तहत आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके हिंसात्मक रवैये के लिए कार्रवाई करने के लिए भी आदेश जारी करने की मांग की गई है.

स्ट्रे-डॉग्स के हमले में हुई थी बच्ची की मौत

पिछले महीने फरवरी में तुग्लक लेन क्षेत्र स्थित धोबी घाट में स्ट्रे-डॉग्स ने एक डेढ़ साल की बच्ची पर हमला कर दिया था. इसमें वह बुरी तरह घायल हो गई थी और आखिरी में उसकी मौत हो गई. बच्ची एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थी. बच्ची के पिता ने बताया कि आवारा कुत्तों के हिंसा को लेकर अधिकारियों को शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई.

दिल्ली: वसंत कुंज के एंबियंस मॉल में टला बड़ा हादसा, सिलिंग गिरने से ग्राउंड फ्लोर के कांच टूटे

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घटना मध्य रात्रि की है, लिहाजा मॉल खाली था. मॉल प्रशासन द्वारा इस मेंटेनेंस कार्य को पूरा करने के लिए सोमवार को पूरे दिन मॉल को बंद रखा. मेंटेनेंस कार्य पूरा करके मंगलवार से वसंत कुंज का एंबिएंस मॉल फिर सुचारू रूप से खुल जाएगा.

राजधानी दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में स्थित एंबिएंस मॉल में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात बड़ा हादसा टल गया. देर रात करीब 2:00 बजे रूटीन मेंटेनेंस वर्क के दौरान मॉल के ऊपरी हिस्से में लगा जिप्सम क्लैडिंग सिलिंग थोड़ा झुक गया. उसे उतारने की कोशिश हो रही थी, तभी सिलिंग गिर गई. इसकी वजह से मॉल के एक हिस्से में कुछ कांच टूट गए.

गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी तरह के जान माल का नुकसान नहीं हुआ. क्योंकि घटना मध्य रात्रि की है, लिहाजा मॉल खाली था. मॉल प्रशासन द्वारा इस मेंटेनेंस कार्य को पूरा करने के लिए सोमवार को पूरे दिन मॉल को बंद रखा. मेंटेनेंस कार्य पूरा करके मंगलवार से वसंत कुंज का एंबिएंस मॉल फिर सुचारू रूप से खुल जाएगा.

घटना पर दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा, ‘एंबिएंस मॉल के सेंट्रल हॉल में एक साइड पॉप एलिवेशन गिर गया, जहां एस्केलेटर लगाए गए हैं. घटना देर रात की है, जिसमें किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है. आगे की पूछताछ जारी है’.

इससे एक दिन पहले रविवार को नोएडा एक्सटेंशन के एक शॉपिंग मॉल की पांचवीं मंजिल से लोहे की ग्रिल गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी. पीड़ितों की पहचान हरेंद्र भाटी और शकील के रूप में हुई है. दोनों गैलेक्सी ब्लू सफायर मॉल के ग्राउंड फ्लोर पर एस्केलेटर की ओर जा रहे थे, तभी दुर्घटना हुई. लोहे की ग्रिल की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

पुलिस के मुताबिक इस हादसे में जान गंवाने वाले दोनों व्यक्तियों की उम्र 35 साल थी. वे निकटवर्ती गाजियाबाद जिले के विजय नगर इलाके के निवासी थे और रविवार को खरीदारी के लिए नोएडा एक्सटेंशन के गैलेक्सी ब्लू सफायर मॉल में गए थे, जब यह घटना हुई. एडिशनल डीसीपी (सेंट्रल नोएडा) हृदेश कठेरिया ने कहा कि पीड़ितों के परिवारों से संपर्क किया गया है और उनकी ओर से शिकायत मिलने पर मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्या स्वामी प्रसाद मौर्य BSP में वापस आ जाएंगे? Jamkar ने मायावती की प्रशंसा की

राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. लोकसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा में लौटने के कयास लगाए जा रहे है. ऐसा इसलिये कहा जा रहा है कि क्योंकि पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के प्रशासन की तारीफ की है.

हाला ही में समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी का गठन किया है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने एक बयान में कहा कि प्रशासक के रूप में मायावती की बराबरी न कर पाया है और न कोई कर पा रहा है. उन्होंने कहा कि काशीराम ने जो नारा दिया था, उसे बसपा प्रमुख मायावती ने उसे बदल दिया है.

इंडिया एलायंस देश की आवश्यकता है- स्वामी प्रसाद मौर्य
उन्होंने भाजपा सरकार में पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में किसान, मजदूर, छात्र और नौजवान सभी परेशान हैं. इंडिया गठबंधन देश की आवश्यकता है, भाजपा को सत्ता से हटाना जरूरी है. बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को सुरक्षा मिलने पर भी उन्होंने खुशी जताई है.

सूत्रों का कहना कि स्वामी प्रसाद मौर्य बसपा के साथ बेहतर रिश्ते रखकर अगला कदम उठाना चाहते हैं. वे बसपा से बाहरी रूप से जुड़ कर राजनैतिक रूप से सक्रिय रहेंगे. स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश को बचाने के लिए लोकतंत्र को बचाने के लिए, संविधान को बचाने के लिए साथ ही देश में बढ़ी हुई महंगाई पर रोक लगाने, नौजवानों को रोजगार दिलाने, किसानों को इंसाफ दिलाने, व्यापारियों को शोषण से मुक्त कराने को लेकर इंडिया एलायंस देश की आवश्यकता है. इसलिए राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी इंडिया एलायंस को सपोर्ट करेगी, वो भी बिना किसी शर्त के सपोर्ट करेगी.

 

लोकसभा चुनाव से पहले यूपी पुलिस में महिला कर्मियों के लिए बड़ा फैसला: बीट तैनाती मिलेगी

लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है. यह जानकारी राज्य के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने दी है. महिला पुलिसकर्मियों को लेकर उत्तर प्रदेश डीजीपी ने अहम फैसला लिया है.

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार महिला पुलिसकर्मी अब सिर्फ संतरी और ऑफिस की ड्यूटी नहीं करेंगी, उन्हें बीट पर भी तैनात किया जाएगा. डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों को उनकी योग्यता के अनुसार पुरुष पुलिसकर्मियों की तरह ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा.

Yogi Cabinet Expansion: सुनील शर्मा ने चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया, उनका नाम इंडिया बुक में दर्ज है, अब मंत्री बनेंगे

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंगलवार को कैबिनेट विस्तार प्रस्तावित है. इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम साहिबाबाद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुनील शर्मा का है. माना जा रहा है कि सुनील शर्मा, सीएम योगी की पसंद हैं.

साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा तीसरी बार के विधायक हैं . सबसे पहले 15वीं विधानसभा में वह गाजियाबाद की सीट से चुनकर विधायक बने थे . उसके बाद 17वीं और 18वीं विधानसभा में वह साहिबाबाद की सीट से चुनकर विधायक आए हैं.

सुनील शर्मा की गिनती बड़े ब्राह्मण नेताओं में होती है ,तो वहीं उनको उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और  देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दोनों का बेहद करीबी भी माना जाता है

2017 के विधानसभा चुनाव में शर्मा सबसे अधिक वोटो से जीते थे इस दौरान उनका मार्जिन तकरीबन डेढ़ लाख वोटो का था वही 2022 की विधानसभा चुनाव में भी शर्माने सबसे अधिक वोटो से चुनाव जीता था इस दौरान वह करीब 2 लाख 14 हजार से अधिक मार्जिन से जीते थे.