Noida Land Policy Change: जमीन अधिग्रहण की नीति में बड़े बदलाव की तैयारी में नोएडा प्राधिकरण, किसानों से विकास शुल्क लेकर जमीन होगी नियमित
नोएडा शहर के विकास और किसानों के साथ दशकों से चले आ रहे भूमि विवादों के स्थायी समाधान के लिए नोएडा विकास प्राधिकरण अपनी दशकों पुरानी भूमि अधिग्रहण नीति में एक युगांतरकारी बदलाव करने जा रहा है। प्राधिकरण के उच्चाधिकारी इस नए प्रस्ताव पर गंभीरता से मंथन कर रहे हैं, जिसके तहत अधिसूचित क्षेत्र में किसानों की बची हुई जमीनों का जबरन अधिग्रहण करने के बजाय उन्हें नियमित (रेगुलराइज) कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने पर प्राधिकरण जमीन मालिकों से निर्धारित ‘विकास शुल्क’ (डेवलपमेंट चार्ज) वसूलेगा और किसान अपनी पुश्तैनी जमीन पर मास्टर प्लान के भू-उपयोग के अनुसार वैध निर्माण कर सकेंगे। इस ऐतिहासिक प्रस्ताव पर विधिक विशेषज्ञों की अंतिम राय ली जा रही है और इसे इसी महीने होने वाली आगामी बोर्ड बैठक में पेश किए जाने की पूरी संभावना है।
नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र की लगभग 90 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण प्राधिकरण द्वारा पूर्व के वर्षों में पहले ही किया जा चुका है। बाकी बची 10 प्रतिशत जमीन को लेकर प्राधिकरण और किसानों के बीच गहरा गतिरोध बना हुआ है, क्योंकि इस जमीन के बड़े हिस्से पर किसानों की पुरानी आबादी, मकान और व्यावसायिक दुकानें स्थापित हैं। यदि यह नीति बोर्ड से स्वीकृत हो जाती है, तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे नलगढ़ा सहित दर्जनों गांवों के हजारों मूल निवासियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को अब अपनी ही जमीन पर निर्माण करने के लिए ध्वस्तीकरण या नोटिस का डर नहीं सताएगा और वे विकास शुल्क का भुगतान कर अपनी संपत्ति का वैधानिक नक्शा पास करा सकेंगे।
प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से किसानों के साथ-साथ प्राधिकरण को भी दोहरा फायदा होगा। एक तरफ जहां प्राधिकरण को जमीन अधिग्रहण के भारी-भरकम मुआवजे के रूप में करोड़ों रुपये खर्च करने से मुक्ति मिलेगी और विकास शुल्क के रूप में भारी राजस्व प्राप्त होगा, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न दीवानी अदालतों और हाईकोर्ट में चल रहे सैकड़ों भूमि विवाद और मुकदमे हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे। मुकदमों के निस्तारण से शहर में अटके हुए बुनियादी विकास कार्यों में अप्रत्याशित तेजी आएगी और नियोजित विकास को नया आयाम मिलेगा।

